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GE ने HAL को सौंपा तीसरा F-404 इंजन, Tejas में लगेगा पावर का नया पंख

by | Sep 11, 2025 | देश

F-404 Engine : भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट में बड़ा कदम उठाया गया है। फ्रांस की इंजन बनाने वाली कंपनी Safran S.A. और डीआरडीओ की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) मिलकर ऐसा इंजन बनाने जा रहे हैं, जो पूरी तरह भारत में ही तैयार होगा।

अमेरिकी कंपनी से न हो पाया काम, फ्रांस आगे आया

अमेरिकी कंपनी GE के साथ डील आगे नहीं बढ़ पाई थी। लेकिन अब फ्रांस की कंपनी सफ्रान ने भारत को पूरी तरह सहयोग देने का भरोसा दिया है। इसका मतलब है कि भारत में ही फाइटर जेट का इंजन बनेगा और इसमें किसी दूसरे देश पर निर्भरता नहीं होगी।

पीएम मोदी और रक्षा मंत्री का विज़न

15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से देश में ही जेट इंजन बनाने का आह्वान किया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कई बार इस बात पर जोर दे चुके हैं कि भारत को अपने फाइटर जेट इंजन खुद बनाने चाहिए। अब फ्रांस के साथ बातचीत इस दिशा में बड़ा कदम है।

12 साल का प्रोजेक्ट, 9 प्रोटोटाइप बनेंगे

रिपोर्ट के अनुसार, Safran-GTRE अगले 12 साल में 9 प्रोटोटाइप इंजन तैयार करेंगे। शुरुआत में ये इंजन 120 kN पावर देंगे और आगे चलकर इसकी क्षमता 140 kN पावर तक बढ़ाई जाएगी।

भारत को मिलेगा 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि सफ्रान भारत को 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेगी। इसमें क्रिस्टल ब्लेड टेक्नोलॉजी भी शामिल होगी। इंजन से जुड़े सभी बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) भारत के पास रहेंगे। यानी इंजन पूरी तरह से भारत का होगा।

डील पर जल्द लगेगी मुहर

पिछले दो साल से यह डील चर्चा में थी। अब सरकार इसे हरी झंडी देने के करीब है। AMCA मल्टी-रोल एयरक्राफ्ट होगा, जिसमें दो इंजन होंगे। इनके लिए 120-140 kN इंजन भारत में बनाए जाएंगे। निर्माण में टाटा ग्रुप, लार्सन एंड टूब्रो और अडानी डिफेंस जैसी निजी कंपनियां भी जुड़ेंगी।

चीन पर होगा दबाव

आज भी चीन के पास अपने फाइटर जेट के लिए भरोसेमंद इंजन नहीं है। वह रूस या कॉपी किए गए इंजनों पर निर्भर है। दुनिया में केवल अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन ही इस तकनीक में आगे हैं। अब अगर भारत अपने इंजन बनाने लगता है, तो यह कदम चीन को जरूर परेशान करेगा।

कावेरी इंजन की अधूरी कहानी

भारत ने दशकों पहले कावेरी इंजन प्रोजेक्ट शुरू किया था, लेकिन वह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। अब फ्रांस के साथ मिलकर भारत का सपना सच होने की ओर बढ़ रहा है।