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मौसम बदलते ही क्यों आने लगती हैं छींकें? जानें इसके लक्षण

Sneezing during weather change: जैसे ही मौसम बदलता है, कई लोगों को सुबह उठते ही ठंडी हवा लगती है या लगातार छींक आने लगती है। कुछ छींक के बाद यह रुक जाती है, जबकि कुछ लोगों में यह समस्या कई दिनों तक बनी रहती है। आमतौर पर इसे कमजोर इम्यूनिटी का कारण बताते है, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग और वैज्ञानिक है।

छींक आना क्या दर्शाता है

छींक आना कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की सुरक्षा प्रतिक्रिया है। नाक के अंदर मौजूद झिल्ली बहुत संवेदनशील होती है। जब वहां धूल, धुआं, ठंडी हवा, पराग कण या तेज गंध पहुंचती है, तो दिमाग तुरंत छींक के जरिए उसे बाहर निकालने की कोशिश करता है। इसका मतलब यह हुआ कि छींक आना कई बार शरीर के सही ढंग से काम करने का संकेत भी हो सकता है।

मौसम बदलते समय समस्या क्यों बढ़ जाती है

मौसम परिवर्तन के दौरान हवा में कई तरह के बदलाव होते हैं तापमान में अचानक गिरावट या बढ़ोतरी हवा में नमी का असंतुलन, धूल और एलर्जी पैदा करने वाले कणों की मात्रा बढ़ना। ये सभी नाक की अंदरूनी परत को उत्तेजित कर देते हैं, जिससे छींक बार-बार आती है। यह स्थिति उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जिनकी नाक पहले से संवेदनशील होती है।

क्या यह कमजोर इम्यूनिटी से जुड़ा हो सकता है?

हर छींक को कमजोर इम्यूनिटी से जोड़ना सही नहीं है, लेकिन बार-बार छींक के साथ सर्दी-जुकाम होना यह संकेत देता है कि शरीर जल्दी थक रहा है और इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ रहा है, जिससे वह वायरस और बैक्टीरिया से ठीक से नहीं लड़ पाता।

एलर्जी की भूमिका को समझना जरूरी

कई मामलों में यह समस्या एलर्जी के कारण होती है। एलर्जी में इम्यून सिस्टम कमजोर नहीं होता, बल्कि जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है। वह धूल या जैसे सामान्य तत्वों को भी खतरा मान लेता है और छींक, नाक बहना, आंखों में जलन जैसे लक्षण पैदा करता है।

शरीर की सुरक्षा क्षमता मजबूत कैसे रखें?

ताजा और पौष्टिक भोजन लें पर्याप्त पानी पिएं पूरी नींद लें, क्योंकि नींद इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है धूल। मौसम बदलते समय बार-बार छींक आना हमेशा कमजोर इम्यूनिटी का संकेत नहीं होता। यह शरीर की संवेदनशीलता या एलर्जी का परिणाम भी हो सकता है। हालांकि, अगर छींक के साथ संक्रमण बार-बार हो रहा है, तो यह सेहत पर ध्यान देने का संकेत जरूर है। सही देखभाल और समय पर सलाह से इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

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