Sleeping With Heater: सर्दियों में ठंड से बचने के लिए लोग रातभर कमरे में हीटर चलाकर सोते है जोकि आम बात है, लेकिन यह आराम कई बार फेफड़ों के लिए खतरा बन जाता है। हीटर की लगातार गर्म हवा कमरे की नमी सोख लेती है और माहौल को इतना सूखा बना देती है कि शरीर पर इसका सीधा असर दिखने लगता है। गले में खराश, आंखों में जलन, त्वचा का रूखापन जैसे हल्के लक्षण तो दिखाई देते ही हैं, लेकिन असली नुकसान धीरे-धीरे फेफड़ों तक पहुंचता है।
कैसे पड़ता है फेफड़ो पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, रातभर सूखी हवा में सांस लेने से फेफड़ों की नलिकाएं सिकुड़ने लगती हैं, जिससे सुबह उठते ही गले में सूखापन, सूखी खांसी, सीने में भारीपन और सांस फूलने जैसी तकलीफें महसूस होने लगती हैं। कुछ लोगों को रात में लगातार खांसी आती है, जो शुरुआत में सामान्य सर्दी-जुकाम जैसी लगती है, लेकिन यह फेफड़ों पर बढ़ते दबाव का संकेत होती है।
क्या है इसके लक्षण
पल्मोनोलॉजिस्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर बताते हैं कि अत्यधिक सूखी हवा फेफड़ों के अंदर मौजूद म्यूकस को गाढ़ा कर देती है, जिससे हवा का प्रवाह रुकने लगता है। यह स्थिति फेफड़ों की सफाई करने की क्षमता को कम करती है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ाती है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी से पीड़ित लोगों पर इसका असर तुरंत और ज्यादा दिखाई देता है। ऐसे मरीजों में खांसी बढ़ना, सांस का फूलना और रात में घुटन जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
क्या है बचाव के उपाय
- कमरे में हल्का वेंटिलेशन रखें, ताकि हवा बंद न हो
- पास में पानी की बाल्टी या ह्यूमिडिफायर रखें ताकि नमी बनी रहे
- पूरी रात हीटर न चलाएं, बीच-बीच में बंद करें
- बच्चों और बुजुर्गों को हीटर के बहुत पास ना बैठाएं
हीटर ठंड से राहत जरूर देता है, लेकिन गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो फेफड़ों पर इसका असर गंभीर हो सकता है। इसलिए सर्दियों में गर्मी भी लें… लेकिन संभलकर।
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