Rock Salt Vs White Salt : जैसे की आप लोग जानते होंगे कि उपवास या नवरात्र के दिनों में केवल सेंधा नमक ही खाया जाता है। लेकिन क्या कभी सोचा है कि इसके पीछे सिर्फ परंपरा है या कोई वैज्ञानिक वजह भी?
आइए जानते हैं, सेंधा और सफेद नमक में क्या है असली फर्क और सेहत के लिए कौन सा बेहतर है।

सेंधा नमक: प्राकृतिक खनिजों से भरपूर
सेंधा नमक (Rock salt) पहाड़ों की खदानों से निकाला जाता है और इसे किसी तरह की प्रोसेसिंग से नहीं गुजारा जाता। यही वजह है कि इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन और जिंक जैसे प्राकृतिक मिनरल्स बरकरार रहते हैं। इसका हल्का गुलाबी रंग इसे “PINK Salt” भी बनाता है। आयुर्वेद में इसे शुद्ध माना गया है और इसलिए उपवास में इसका प्रयोग होता है।
सबसे अहम बात यह है कि सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा सामान्य सफेद नमक की तुलना में कम होती है, जो दिल के मरीजों के लिए इसे बेहतर विकल्प बनाती है।
सफेद नमक: आयोडीन से भरपूर लेकिन ज्यादा सोडियम वाला
सफेद नमक समुद्री पानी से तैयार होता है और कई प्रक्रियाओं से गुजरकर शुद्ध किया जाता है। इस दौरान इसके प्राकृतिक खनिज खत्म हो जाते हैं। हालांकि इसमें आयोडीन मिलाया जाता है, जो थायराइड और दिमागी विकास के लिए जरूरी है।
लेकिन सफेद नमक में सोडियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सेहत के लिहाज से कौन है बेहतर?
विशेषज्ञों के अनुसार सेंधा नमक को बेहतर माना जाता है क्योंकि:
- इसमें सोडियम कम होता है।
- यह 80 से अधिक ट्रेस मिनरल्स से भरपूर होता है।
- पाचन को दुरुस्त करता है और गैस व अपच से राहत देता है।
सेंधा नमक में आयोडीन की कमी
सेंधा नमक के कई फायदे हैं, लेकिन इसमें आयोडीन की कमी होती है। यदि लंबे समय तक केवल सेंधा नमक का सेवन किया जाए, तो शरीर में आयोडीन की कमी हो सकती है, जिससे थायराइड जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
संतुलन ही है सबसे सही तरीका
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजमर्रा के खाने में सफेद नमक का इस्तेमाल करें ताकि शरीर को पर्याप्त आयोडीन मिल सके। वहीं, नवरात्र या व्रत के दिनों में सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है।

