Shehbaz Sharif: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिका और ईरान पश्चिम एशिया में महीनों से जारी संघर्ष समाप्त करने के लिए एक प्रारंभिक समझौते के मसौदे पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अगले 24 घंटे में इसकी इलेक्ट्रॉनिक साइनिंग हो सकती है, जिसके बाद अगले सप्ताह तकनीकी स्तर की वार्ता शुरू होगी। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच संवाद को सुगम बनाने में अपनी भूमिका का भी उल्लेख किया।
हालांकि, व्हाइट हाउस और ईरानी नेतृत्व ने अभी तक शरीफ के दावे की पुष्टि नहीं की है। इससे पहले भी शांति को लेकर कई दावे सफल नहीं हो पाए थे।
समझौते में क्या-क्या शामिल है?
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, शुरुआती चरण में युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर ध्यान होगा। इसके बाद 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े तकनीकी मुद्दों, खासकर उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने या नष्ट करने पर बातचीत होगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि परमाणु मुद्दों पर बाद के चरण में चर्चा होगी और जरूरत पड़ने पर समयसीमा बढ़ाई जा सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों में राहत
दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। संघर्ष के कारण यहां जहाजरानी प्रभावित हुई और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा। प्रस्तावित समझौते में जलमार्ग को फिर से खोलने, चरणबद्ध प्रतिबंधों में राहत और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने के प्रावधान शामिल होने की संभावना है।
तनाव अभी भी बरकरार
कूटनीतिक प्रगति के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने वाले कई ईरानी ड्रोन को रोका। इससे वार्ता की नाजुक स्थिति भी सामने आई। अगर समझौता अंतिम रूप लेता है तो वैश्विक तेल बाजार स्थिर हो सकते हैं। वहीं, खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात और समुद्री क्षेत्र में कार्यरत हजारों नागरिकों के कारण भारत के आर्थिक और मानवीय हितों को भी राहत मिल सकती है। हालांकि, आने वाले दिन तय करेंगे कि यह प्रयास ऐतिहासिक सफलता बनेगा या एक और अधूरी पहल।
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