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Stock Market Crash: सेंसेक्स 1300 अंक लुढ़का, निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूबे, जानिए गिरावट की वजह

Stock Market Crash: मंगलवार को मामूली रिकवरी के बाद बुधवार को शेयर बाजार में अचानक भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1,342.27 अंक यानी 1.72% की भारी गिरावट के साथ 76,863.71 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 394.75 अंक या 1.63% लुढ़ककर 23,866.85 पर आ गया। इस गिरावट से निवेशकों के लगभग 5 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बीएसई टॉप 30 शेयरों में से केवल 2 शेयरों में बढ़त रही, बाकी 28 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

किस सेक्टर ने दिखाया सबसे अधिक दर्द

बाजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों ने गिरावट में सबसे अधिक योगदान दिया। ऑटो, बैंक, आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर्स में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।

बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें

  1. FII की लगातार बिक्री

10 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 4,673 करोड़ रुपये की नेट सेलिंग की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,333 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की।

  1. प्रॉफिट बुकिंग

पिछले सत्र में तेजी के बाद निवेशकों ने अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचे। इससे सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली।

  1. भू-राजनीतिक तनाव

मिडिल ईस्ट संकट ने निवेशकों को चिंतित कर रखा है। अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों की खबरों ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा की। इस कारण निवेशक जोखिम कम करने के लिए अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित कर रहे हैं।

निवेशकों को भारी नुकसान

बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन में बुधवार को 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट हुई। मंगलवार को यह 447 लाख करोड़ रुपये था, जो गिरकर 441.90 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

विशेषज्ञों की राय

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च प्रमुख देवर्ष वकील ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है और यही बाजार में तनाव की मुख्य वजह है। उन्होंने यह भी कहा कि 16 प्रमुख क्षेत्रों में से आठ में गिरावट देखने को मिली। स्मॉलकैप शेयरों में मामूली तेजी रही, जबकि मिडकैप शेयर स्थिर रहे।

भारत में वीआईएक्स में तेजी

इंडिया वीआईएक्स यानी बाजार अस्थिरता का सूचकांक 11 मार्च को 8% बढ़कर 20.5 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि निवेशक अल्पकालिक अस्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय असर

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के बाद तेल की कीमतों में अल्पकालिक गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने कच्चे तेल के भंडार से रिकॉर्ड मात्रा में निकासी का प्रस्ताव रखा, जिससे वैश्विक शेयर बाजार को कुछ राहत मिली।

निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का है। बाजार में भू-राजनीतिक और वैश्विक आर्थिक कारक लगातार असर डाल रहे हैं। जोखिम प्रबंधन और विवेकपूर्ण निवेश ही फिलहाल सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है।

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