Uttar Pradesh Backward Commission: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पंचायत चुनाव से ठीक पहले पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर बड़ा दांव खेला है। इस आयोग का मुख्य कार्य पंचायत निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की पिछड़ेपन की प्रकृति और उसके प्रभावों का अध्ययन करना है। आयोग को 6 महीने के अंदर OBC आरक्षण से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह को इस 5 सदस्यीय आयोग का चेयरमैन बनाया गया है, जबकि रिटायर्ड ADJ ब्रजेश कुमार और संतोष विश्वकर्मा को सदस्य नियुक्त किया गया है। इनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से 6 महीने के लिए की गई है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले का सीधा काउंटर माना जा रहा है।
वर्तमान प्रधानों और प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ सकता है
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने के लिए समर्पित आयोग के गठन संबंधी अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी गई। इस आयोग के गठन के साथ ही पंचायत चुनाव को लेकर चल रही सबसे बड़ी कानूनी अड़चन काफी हद तक दूर हो गई है। हालांकि, अब भी चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर संशय बना हुआ है और इसके टलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इस बीच पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनाव तक वर्तमान प्रधानों और प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए शासन को औपचारिक पत्र भी भेजा जा चुका है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है
पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर के अनुसार विभाग ने शासन को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल प्रशासकों के माध्यम से बढ़ाने की सिफारिश की गई है। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी ने पंचायत चुनाव को टालने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, ऐसे में शासन को पंचायत व्यवस्था को प्रशासक समिति के हवाले सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस व्यवस्था के तहत न केवल ग्राम प्रधान, बल्कि ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल भी प्रशासक समिति के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसी स्थिति में पंचायत चुनाव के विधानसभा चुनाव के बाद होने की संभावना जताई जा रही है।

