world media on trump tariff on india : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाया गया 50% टैरिफ बुधवार से लागू हो गया है. ट्रंप ने यह कदम रूस से तेल खरीद और पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम को लेकर भारत पर नाराजगी जताते हुए उठाया है. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और ऐसे में इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर खलबली मचा दी है. दुनिया भर की मीडिया इस पर तीखी प्रतिक्रिया दे रही है.
अमेरिकी मीडिया: भारत को खोना अमेरिका के लिए घातक
सीएनएन ने भारत पर भारी टैरिफ लागू होने की खबर को प्रमुखता से कवर किया है. एक विश्लेषण में चैनल ने कहा कि इस टैरिफ विवाद ने अमेरिका को भारत जैसे अहम सहयोगी से दूर कर दिया है. विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप की यह नीति अमेरिका के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है.सीएनएन ने बताया कि ट्रंप का मानना है कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से रूस की मदद करना है, इसलिए यह ‘सजा’ दी गई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस फैसले का खामियाजा अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है. भारतीय सामानों की महंगी कीमतें अमेरिकी बाजार में महंगाई और बेरोजगारी बढ़ा सकती हैं.
ब्रिटेन: ट्रंप ने सब कुछ गंवा दिया
ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने इसे भारत-अमेरिका संबंधों में अब तक की सबसे बड़ी क्षति करार दिया है. एक वरिष्ठ भारतीय व्यापार अधिकारी के हवाले से लिखा गया है,ट्रंप ने सब कुछ गंवा दिया है.गार्डियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इस फैसले को लेकर विद्रोही माहौल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल की खरीद जारी रखने के संकेत दिए हैं और देशवासियों से मेड इन इंडिया उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की है. गार्डियन के डिप्लोमैटिक एडिटर पैट्रिक विन्टॉर ने अपने लेख में लिखा कि ट्रंप की टैरिफ नीति पुराने वैश्विक गठबंधनों को बदल रही है. ब्राजील, रूस, भारत और चीन जैसे देश मिलकर इसका विरोध कर रहे हैं, जिससे अमेरिका के खिलाफ एक नई वैश्विक धुरी बनने की संभावना बन रही है.
रॉयटर्स: छोटे निर्यातकों और नौकरियों पर संकट
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार,टैरिफ लागू होते ही भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव चरम पर पहुंच गया है. खास तौर पर भारत के गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों में छोटे निर्यातकों और रोजगार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई गई है. एजेंसी ने लिखा कि भारत और अमेरिका के बीच पांच दौर की व्यापार वार्ताएं विफल हो चुकी थीं. भारतीय पक्ष को उम्मीद थी कि टैरिफ को 15% तक सीमित किया जा सकता है, जैसा कि अमेरिका ने जापान और यूरोपीय संघ जैसे अन्य साझेदार देशों के लिए किया है.
चीन: भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर असर
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत पर 50% तक टैरिफ अमेरिका के सबसे ऊंचे टैरिफ में से एक है. इससे भारत और अमेरिका के बीच तनाव और गहरा गया है. अखबार ने एक जर्मन मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पीएम मोदी ने ट्रंप के चार बार फोन करने के बावजूद उनसे बात नहीं की. यह दर्शाता है कि भारत की नाराजगी कितनी गहरी है.
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कतर: भारतीय अर्थव्यवस्था को झटका
कतर के सरकारी ब्रॉडकास्टर अलजजीरा ने लिखा है कि अमेरिका को भारत द्वारा निर्यात किए जा रहे 87 अरब डॉलर के सामानों पर इस फैसले का प्रभाव पड़ सकता है. भारत सरकार ने ट्रंप के इस फैसले को अनुचित और अविवेकपूर्ण बताया है. सरकार के अनुमान के अनुसार, करीब 48 अरब डॉलर के निर्यात पर असर पड़ेगा, जिससे नौकरियां और देश की विकास दर प्रभावित हो सकती है.
आर्थिक नुकसान की आशंका
गोल्डमैन सैक्स के प्रमुख भारत अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने चेतावनी दी है कि यदि यह टैरिफ लंबे समय तक जारी रहा, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5% से गिरकर 6% से नीचे आ सकती है. भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले जिन उत्पादों को टैरिफ से छूट मिली है, उनमें दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स, कच्ची दवाइयां और रिफाइंड तेल शामिल हैं जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 30% हिस्सा हैं.

