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ईरान से तनाव और इस मुस्लिम देश के साथ न्यूक्लियर डील, जानें कौन है वो देश जिस पर मेहरबान है अमेरिका?

by | Jul 19, 2025 | दुनिया

US Nuclear Deal: इजरायल-ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने जिस तरह से इजरायल का साथ दिया, उसके बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। इसी बीच अमेरिका ने बहरीन के साथ शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा में सहयोग के लिए एक अहम समझौता किया है।  दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल लतीफ बिन राशिद अल जयानी ने हस्ताक्षर किए।

एक-दूसरे के करीबी साझेदार हैं अमेरिका-बहरीन

अमेरिका-बहरीन के बीच हुए इस समझौते का नाम सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी NCMOU है। इसका मकसद परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में एक-दूसरे का साथ देने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाना है। दरअसल, अमेरिका और बहरीन सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में पहले से ही एक-दूसरे के करीबी साझेदार हैं।

दोनों देशों के रिश्ते को मजबूत बनाएगा समझौता

ऐसे में नया समझौता दोनों देशों के रिश्ते को और भी मजबूत बनाएगा। इस समझौते में परमाणु सुरक्षा, तकनीक का सुरक्षित इस्तेमाल और परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकने जैसे पहलुओं पर खास ध्यान दिया गया है। इतना ही नहीं, यह समझौता अमेरिका और बहरीन (US Nuclear Deal) के बीच मजबूत रणनीतिक संबंधों को स्थापित करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल में विकसित की गई एक खास कूटनीतिक पहल का हिस्सा है। इसका मकसद अमेरिकी उद्योग और कार्यबल को वैश्विक मंच पर अवसर दिलाना भी है।

मनामा को कई तरह से सहयोग करेगा अमेरिका

दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के तहत वॉशिंगटन, मनामा को न्यूक्लियर (US Nuclear Deal) रिसर्च, टेक्नोलॉजी, सुरक्षा मानकों और विशेषज्ञ ट्रेनिंग में सहयोग करेगा। जबकि बहरीन ने साल 2060 तक खुद को कार्बन न्यूट्रल बनाने का जो लक्ष्य रखा है, यह समझौता उस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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बहरीन एक छोटा देश है जिसके लिए स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स यानी SMRs कारगर साबित हो सकते हैं। ये रिएक्टर जगह भी कम लेते हैं और कम खर्चीले होते हैं साथ ही ऑपरेशन में भी आसान हैं। UAE की तरह अब बहरीन भी विदेशी विशेषज्ञों की मदद से SMR आधारित ऊर्जा उत्पादन की तैयारी कर रहा है।  बहरीन ने इस न्यूक्लियर सहयोग के साथ-साथ अमेरिका में 17 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है। यह निवेश एविएशन, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। इसके अलावा एक 800 किलोमीटर लंबी सबमरीन फाइबर ऑप्टिक केबल परियोजना की भी तैयारी चल रही है, जो बहरीन को सऊदी अरब, कुवैत और इराक से जोड़ेगी।

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