US Iran Relations: मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब एक बड़े युद्ध का रूप ले चुका है, और इस संघर्ष के तीसरे हफ्ते में तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। कभी तेज़ और निर्णायक जीत की उम्मीद रखने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पअब खुद रणनीतिक घेराबंदी में फंसते दिख रहे हैं। जहां एक ओर ईरान अपेक्षा से कहीं अधिक मजबूती के साथ खड़ा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका को अपने ही सहयोगियों का साथ नहीं मिल पा रहा। इस स्थिति ने ट्रंप प्रशासन की कई अहम गलतियों को उजागर कर दिया है।
आइए जानते हैं वे 5 बड़ी चूकें, जिनकी वजह से अमेरिका इस जंग में उलझता चला गया-
1.युद्ध का गलत आकलन पड़ा भारी
शुरुआत में ट्रंप प्रशासन को भरोसा था कि सीमित हवाई हमलों से ईरान की सत्ता को कमजोर कर तख्तापलट कराया जा सकता है। लेकिन ईरान की जटिल सत्ता संरचना और सैन्य नेटवर्क ने इस रणनीति को पूरी तरह विफल कर दिया। अब यह संघर्ष लंबा और जटिल बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि अगर अमेरिका को बढ़त चाहिए, तो जमीनी सेना उतारनी पड़ सकती है जो एक बड़ा और जोखिम भरा फैसला होगा।
- खुफिया एजेंसियों की चेतावनी को नजरअंदाज करना
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने युद्ध से पहले स्पष्ट चेतावनी दी थी कि केवल हवाई हमलों से ईरान की सत्ता नहीं बदलेगी, बल्कि इससे शासन और मजबूत हो सकता है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि ऐसी स्थिति में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर और प्रभावी हो जाएगा। इसके बावजूद इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया जो अब एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हो रही है।
- अरब सहयोगियों को साथ न जोड़ पाना
युद्ध शुरू करने से पहले ट्रंप प्रशासन अपने प्रमुख अरब सहयोगियों को विश्वास में लेने में विफल रहा। कतर औरसंयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने इस कदम पर नाराजगी जाहिर की, जबकि Oman ने बातचीत के बीच हमले पर सवाल उठाए। नतीजा यह हुआ कि इस युद्ध में अमेरिका को क्षेत्रीय समर्थन नहीं मिल पाया जो उसकी रणनीति के लिए बड़ा झटका है।
- गैर-जिम्मेदाराना बयान बने वैश्विक आलोचना का कारण
युद्ध की शुरुआत में अमेरिका को बड़ी सैन्य सफलता मिली, जिसमें ईरान के शीर्ष नेतृत्व को नुकसान पहुंचा। लेकिन इसके बाद ट्रंप के कुछ बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचाया। एक बयान में उन्होंने कहा कि “सैनिकों को इसमें मजा आ रहा है,” जिससे वैश्विक स्तर पर तीखी आलोचना हुई और अमेरिका की कूटनीतिक स्थिति कमजोर पड़ी।
- युद्धविराम पर असमंजस ने भरोसा तोड़ा
जब ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करने का ऐलान किया, तो वैश्विक तेल बाजार और शेयर बाजारों में उथल-पुथल मच गई। इस दौरान ट्रंप के बयान लगातार बदलते रहे, कभी युद्ध खत्म करने की बात, तो कभी इसे जारी रखने का संकेत। इस अस्थिर रुख ने अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए और सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर किया।
अब कौन भारी?
हालांकि शुरुआती हमलों में ईरान को बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन अब वही देश ज्यादा संगठित और मजबूत नजर आ रहा है। इसके विपरीत, अमेरिका रणनीतिक, कूटनीतिक और वैश्विक समर्थन तीनों मोर्चों पर चुनौतियों से जूझ रहा है।
यह युद्ध सिर्फ हथियारों का नहीं, बल्कि रणनीति, धैर्य और वैश्विक समर्थन का भी है। ट्रंप प्रशासन की जल्दबाजी और गलत फैसलों ने एक सीमित कार्रवाई को लंबे और जटिल संघर्ष में बदल दिया है। अब सवाल यह है क्या अमेरिका इस स्थिति से बाहर निकल पाएगा, या यह जंग उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक भूल बन जाएगी?
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