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ट्रंप का चौंकाने वाला यू-टर्न! ईरानी तेल पर ढील से बदल जाएगा वैश्विक खेल, सस्ते हो सकते हैं दाम

US Sanctions On Iran Oil: वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका जल्द ही ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने और कीमतों में नरमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई बाधित होने से तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं।

समुद्र में फंसे तेल को मिल सकती है राहत

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि समुद्र में टैंकरों में रुका हुआ ईरानी तेल बाजार में उतारने की अनुमति दी जा सकती है। अनुमान है कि करीब 140 मिलियन बैरल तेल इस समय प्रतिबंधों के कारण फंसा हुआ है।अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह अतिरिक्त सप्लाई लगभग 10 से 14 दिनों तक वैश्विक मांग को संतुलित रखने में मदद कर सकती है। इससे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा और बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।

क्यों बढ़े थे दाम?

हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रही हैं। इसका मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बाधित होना है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इस रास्ते से रोजाना लाखों बैरल तेल की सप्लाई होती है, और यहां किसी भी तरह की रुकावट सीधे बाजार को प्रभावित करती है।

रूसी तेल पर भी दिखी थी नरमी

इससे पहले अमेरिका ने एक अहम कदम उठाते हुए प्रतिबंधित रूसी तेल को भी सीमित रूप से बाजार में आने की अनुमति दी थी। उस फैसले से करीब 130 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल वैश्विक सप्लाई में जुड़ा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब सप्लाई बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है, ताकि कीमतों को काबू में रखा जा सके।

रिजर्व से भी निकाला जा सकता है तेल

अमेरिका अपने Strategic Petroleum Reserve (SPR) से भी अतिरिक्त तेल जारी करने पर विचार कर रहा है। यह कदम G7 देशों द्वारा पहले से घोषित 400 मिलियन बैरल अतिरिक्त सप्लाई के साथ मिलकर बाजार में बड़ा असर डाल सकता है। सरकार का फोकस साफ है, फ्यूचर्स मार्केट में हस्तक्षेप करने के बजाय वास्तविक सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना।

जापान के साथ रणनीतिक बातचीत

इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची से भी अहम बातचीत करने वाले हैं। चर्चा का मुख्य मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना होगा। जापान, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर है, इस पहल में अहम भूमिका निभा सकता है। संभावना है कि जापान भी अपने रणनीतिक भंडार से अतिरिक्त तेल जारी करे।

क्या आम लोगों को मिलेगी राहत?

अगर ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में ढील मिलती है और सप्लाई बढ़ती है, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे वैश्विक बाजार में स्थिरता आएगी और उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत मिल सकती है। कुल मिलाकर, अमेरिका का यह संभावित यू-टर्न वैश्विक ऊर्जा बाजार के समीकरण बदल सकता है और आने वाले दिनों में तेल की कीमतों की दिशा तय कर सकता है।

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