अमेरिका (America) और दुनिया की टेक इंडस्ट्री में हलचल मचाने वाली खबर सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिर से चर्चा में हैं और इस बार वजह है उनका नया टैरिफ प्रस्ताव। ट्रंप प्रशासन विदेशी इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर टैक्स लगाने की एक अनोखी योजना पर विचार कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह टैक्स किसी सामान की कीमत पर नहीं, बल्कि उसमें लगी चिप्स की संख्या पर आधारित होगा। यानी जितनी ज्यादा चिप्स, उतना ज्यादा टैक्स।
क्यों उठाया यह कदम?
ट्रंप लंबे समय से अमेरिकी (America) कंपनियों को चीन और एशियाई देशों पर निर्भरता कम करने की सलाह देते आए हैं। अब उनका मानना है कि अगर विदेशी कंपनियों के इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद महंगे होंगे, तो अमेरिकी कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन दोनों बड़ी वजहें बताई जा रही हैं।
उपभोक्ताओं पर असर
अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो इसका सीधा असर स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट, वॉच और स्मार्ट होम डिवाइस पर पड़ेगा। क्योंकि इनमें चिप्स की संख्या ज्यादा होती है। इसका मतलब है कि आम उपभोक्ता को ये गैजेट पहले से महंगे दामों पर खरीदने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिका में महंगाई और बढ़ सकती है, जबकि वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित होगी।
क्या होगा आगे?
फिलहाल यह विचार शुरुआती चरण में है और इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। चर्चा है कि ट्रंप प्रशासन 15% से 25% तक के टैरिफ पर विचार कर रहा है। यूरोप और जापान से आने वाले कुछ उत्पादों को आंशिक छूट भी मिल सकती है। लेकिन जैसे ही यह कदम आधिकारिक रूप से लागू होगा, वैश्विक टेक मार्केट में हलचल मचना तय है।
कुल मिलाकर, ट्रंप का यह प्रस्ताव एक ऐसे समय में आया है जब दुनिया सेमीकंडक्टर और माइक्रोचिप्स पर पहले ही भारी दबाव झेल रही है। अब देखना होगा कि यह योजना अमेरिकी उद्योग के लिए वरदान साबित होती है या फिर उपभोक्ताओं और वैश्विक बाजार के लिए नई मुश्किलें खड़ी करती है।
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