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टिकटॉक पर प्रतिबंध नहीं लगेगा? अमेरिका-चीन वार्ता के बाद ट्रंप ने ‘डील’ का दिया बड़ा संकेत

by | Sep 15, 2025 | दुनिया

US-China talks : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को इशारा किया कि चीन के साथ टिकटॉक को अमेरिकी बाजार में जारी रखने को लेकर एक समझौता हो गया है.यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी प्रशासन ने 17 सितंबर की समयसीमा तय की थी, जिसमें ऐप को अमेरिकी स्वामित्व शर्तों का पालन करना था.

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि एक ‘कंपनी’ को लेकर भी समझौता हो गया है,जिसे हमारे देश के युवा लोग बचाना चाहते थे. उन्होंने यह भी कहा कि शुक्रवार को वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत करेंगे.ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यूरोप में अमेरिका-चीन के बीच चल रही बड़ी व्यापारिक वार्ता बहुत अच्छी रही है. हालांकि बीजिंग की ओर से अभी तक किसी समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल स्पेन की राजधानी मैड्रिड में टैरिफ और आर्थिक नीतियों पर चर्चा कर रहे हैं.

अमेरिका की क्या है मांग

अमेरिका की मुख्य मांग रही है कि टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस अपनी हिस्सेदारी कम करे और ऐप को अमेरिकी स्वामित्व में लाया जाए. अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर चीन ने व्यापार शुल्क में रियायतों की अपनी मांगों को नहीं छोड़ा,तो टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने पत्रकारों को बताया कि चीन टिकटॉक से हिस्सेदारी छोड़ने के बदले व्यापार और तकनीकी मोर्चे पर रियायतें चाहता है.

क्यों मुश्किल है टिकटॉक पर बैन

विश्लेषकों का मानना है कि चीन टिकटॉक से हिस्सेदारी छोड़ने को तैयार नहीं है,क्योंकि इससे भविष्य में अन्य चीनी कंपनियों पर भी पश्चिमी देशों द्वारा इसी तरह का दबाव बन सकता है.वहीं अमेरिका के लिए भी टिकटॉक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना आसान नहीं है, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म युवा मतदाताओं में बेहद लोकप्रिय है.

चीन की प्रतिक्रिया

बीजिंग ने सोमवार को कहा कि उसके पास टिकटॉक पर कोई नई जानकारी साझा करने के लिए नहीं है.चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि टिकटॉक को लेकर चीन बार-बार अपनी स्थिति साफ कर चुका है. इसी बीच, चीन के बाजार नियामक ने अमेरिकी चिप कंपनी एनविडिया की एक प्रारंभिक जांच शुरू करने की घोषणा की है,जिसमें उस पर एंटी-ट्रस्ट कानून तोड़ने का आरोप लगाया गया है.विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम वाशिंगटन के दबाव का जवाब हो सकता है.

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