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सुप्रीम कोर्ट की तलवार और अंतरराष्ट्रीय दांव, क्या मौत की सजा से बच पाएंगी शेख हसीना?

by | Nov 18, 2025 | दुनिया

Bangladesh News: बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों बड़े उथल-पुथल से गुजर रही है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन पर हुए दमन के लिए मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। यह सजा उनकी अनुपस्थिति में दी गई, क्योंकि अगस्त 2024 से वे भारत में शरण लिए हुए हैं। अब सवाल यह है कि यदि बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट भी इस फैसले को बरकरार रखता है, तो क्या हसीना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे चुनौती दे सकती हैं?

घरेलू कानूनी रास्ते क्या हैं?

ICT एक्ट 1973 के तहत हसीना को सीधे बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट में अपील का पूरा अधिकार है। भले ही ट्रायल अनुपस्थिति में हुआ हो, उनके वकील निर्धारित समय सीमा के भीतर अपील दायर कर सकते हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश के राष्ट्रपति के पास दया, सजा घटाने या माफ करने की संवैधानिक शक्ति भी मौजूद है। यानी पहला और सबसे महत्वपूर्ण रास्ता बांग्लादेश की अपनी न्यायिक व्यवस्था के भीतर ही है।

क्या अंतरराष्ट्रीय अदालतें मदद करेंगी?

ICC (International Criminal Court) राष्ट्रीय अदालतों के फैसलों की अपील सुनने के लिए नहीं बनी। ICC नई जांच शुरू कर सकता है, लेकिन किसी देश की अदालत के फैसले को उलट नहीं सकता। इसलिए हसीना के मामले में ICC जाकर इस सजा को रुकवाना कानूनी रूप से संभव नहीं। ICJ (International Court of Justice) केवल देशों के बीच विवाद सुनता है, व्यक्तियों के नहीं। किसी तीसरे देश द्वारा बांग्लादेश के खिलाफ ICJ में चुनौती देना अत्यंत कठिन और राजनीतिक रूप से संवेदनशील होगा। साथ ही ICJ किसी राष्ट्रीय आपराधिक सजा को सीधे खारिज नहीं करता।

संयुक्त राष्ट्र ही सबसे व्यावहारिक रास्ता?

UN के मानवाधिकार तंत्र के माध्यम से दबाव जरूर बनाया जा सकता है। मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय पहले ही मौत की सजा को लेकर चिंता जता चुका है। विशेष प्रतिवेदकों और मानवाधिकार परिषद के ज़रिए बांग्लादेश से जवाब तलब हो सकता है। हालांकि, ये मंच कानूनी रूप से फैसले को रद्द नहीं कर सकते, पर नैतिक और कूटनीतिक दबाव जरूर बढ़ा सकते हैं।

भारत में शरण और प्रत्यर्पण का बड़ा सवाल

भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के बावजूद, भारत राजनीतिक प्रकृति वाले मामलों में प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। मौत की सजा एक और प्रमुख कारण है जिसकी वजह से भारत हसीना को वापस भेजने से बच सकता है। ऐसे में भारत का इनकार बांग्लादेश के फैसले पर वैश्विक स्तर पर अविश्वास का संकेत भी माना जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय अदालतों में सीधी अपील का रास्ता

कानूनी रूप से शेख हसीना के पास अंतरराष्ट्रीय अदालतों में सीधी अपील का रास्ता नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव, मानवाधिकार मुद्दे और भारत की कूटनीतिक भूमिका उनका सबसे बड़ा सहारा बन सकते हैं। मामले की जटिलता और राजनीतिक संवेदनशीलता इसे आने वाले समय की सबसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय कानूनी जंग बना सकती है।

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