Nepal Protest : नेपाल इस समय गहरे राजनीतिक और संवैधानिक संकट से गुजर रहा है। जेन-ज़ी (Gen Z) युवाओं के नेतृत्व में हुए जबरदस्त प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया। लेकिन अब सवाल ये है कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा?
सेना ने संभाली कमान, बातचीत जारी
प्रधानमंत्री पद को लेकर गतिरोध बढ़ने के बीच नेपाली सेना ने देश की सुरक्षा की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। सेना सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं देख रही, बल्कि आंदोलनकारी युवाओं से सीधे संवाद भी कर रही है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि उनका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द एक स्थायी समाधान निकले।
सुशीला कार्की का नाम चर्चा के साथ विरोध भी
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस सुशीला कार्की का नाम अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित किया गया है। NGO “हामी नेपाली” और काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह (बालेन) ने उनके नाम का समर्थन किया। बालेन ने शर्त रखी कि पहले संसद भंग होनी चाहिए, तभी अंतरिम सरकार का गठन हो। हालांकि, सभी जेन-ज़ी संगठनों के बीच इस नाम पर सहमति नहीं बन पाई। कई समूहों ने कार्की का विरोध किया, जिससे मसला और उलझ गया है।
आर्मी मुख्यालय में मैराथन मीटिंग
बुधवार को सेना मुख्यालय में करीब 9 घंटे लंबी बैठक चली। इस दौरान कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी एक पर सहमति नहीं बन सकी। सेना ने फिलहाल सभी जेन-ज़ी (Nepal Protest) समूहों से अपील की है कि वे वार्ता में शामिल होकर एक साझा उम्मीदवार तय करें।
हिंसा में 20 युवाओं की मौत
इस संकट के बीच सोमवार को पुलिस कार्रवाई में कम से कम 20 आंदोलनकारी युवाओं की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए। मानवाधिकार संगठनों और विशेषज्ञों ने इन मौतों की जांच की मांग की है।
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क्या गुरुवार तक बनेगी अंतरिम सरकार?
पूर्व मेजर जनरल बिनोज बस्न्यात का कहना है कि नेपाली सेना सत्ता हथियाने के मूड में नहीं है। उनका मानना है कि हालात बिगड़ने से पहले गुरुवार शाम तक अंतरिम सरकार बनने की संभावना है।

