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इस्राइल-ईरान जंग का नया दौर, तेहरान में धमाके, बेरूत से पलायन, कतर ने बदली सुरक्षा रणनीति

Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान के कई शहरों को निशाना बनाया गया। आज तेहरान की राजधानी के विभिन्न हिस्सों में लगातार जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दी गईं, जिससे नागरिकों में भय और सतर्कता बढ़ गई है। हालात लगातार बदल रहे हैं और क्षेत्र में संभावित बड़े संघर्ष का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

तेहरान में लगातार धमाके

ईरान की राजधानी में धमाकों की आवाज़ ने शहर को दहला दिया। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से घरों में सुरक्षित रहने और बाहर अनावश्यक निकलने से बचने की अपील की है। नागरिक सुरक्षा दल ने भी हाई अलर्ट जारी किया है।

दक्षिणी लेबनान से बेरूत की ओर पलायन

लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच हुई गोलीबारी के बाद दक्षिणी लेबनान के लोग बड़े पैमाने पर बेरूत और उत्तरी लेबनान की ओर पलायन कर रहे हैं। इस्राइली सेना ने कम से कम 53 गांवों और कस्बों के निवासियों को अपने घर खाली करने का आदेश दिया। सड़क यातायात को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय सुरक्षा दल सक्रिय हैं, ताकि पलायन सुरक्षित तरीके से हो सके।

कतर ने बदली सुरक्षा रणनीति

ईरानी हमलों के बीच, कतर ने अपनी रक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए हैं। पिछले 48 घंटों में देश ने पैट्रियट डिफेंस सिस्टम तैनात किया था ताकि मिसाइल और ड्रोन को रोक सके। हालांकि, इससे गिरते मलबे का खतरा भी बना रहता था। अब कतर ने फैसला किया कि लड़ाकू विमानों से मिसाइलों को सीधे दोहा शहर के ऊपर नष्ट नहीं किया जाएगा, बल्कि गल्फ के पानी में इन्हें उड़ाया जाएगा।

अमेरिकी हमले और IRGC मुख्यालय पर हमला

अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान पर अपने हमले तेज़ कर दिए हैं। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्यालय को पूरी तरह मलबे में बदल दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस बड़े हमले की पुष्टि की है।

वैश्विक चिंता

पश्चिम एशिया में लगातार हमले और पलायन ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। नागरिक सुरक्षा और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा के लिए देश लगातार अलर्ट पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बढ़ते रहे, तो क्षेत्र में नाटो और अन्य वैश्विक शक्तियों की भागीदारी की संभावना भी बढ़ सकती है।

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