Nepal Protest : नेपाल इन दिनों बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू से लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र और युवा लगातार सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब चर्चा है कि ओली इलाज के बहाने दुबई रवाना हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए उन्होंने हिमालयन एयरलाइंस को भी अलर्ट कर रखा है।
इस्तीफे के बाद विदेश जाने की तैयारी
जानकारी के मुताबिक, ओली ने इस्तीफा देने के तुरंत बाद कार्यवाहक जिम्मेदारी अपने डिप्टी पीएम को सौंप दी है। वहीं, उनके कई मंत्री पहले ही पद छोड़ चुके हैं। राजनीतिक अस्थिरता और जनता के गुस्से को देखते हुए ओली ने देश छोड़ने का मन बना लिया है। कहा जा रहा है कि वह जल्द ही दुबई के लिए फ्लाइट पकड़ सकते हैं।
नेपाल में बढ़ा तनाव
प्रदर्शन अब नेताओं के घरों तक पहुंच गया है। जनकपुर में प्रदर्शनकारियों ने ओली की पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी पीएम रघुवीर महासेठ के घर पर हमला किया। हालात हर दिन और बिगड़ते जा रहे हैं। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
दुबई में शरण की प्रक्रिया कैसी होती है?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ओली दुबई जाते हैं तो उन्हें वहां किस तरह शरण मिलेगी। आम नागरिकों के लिए शरण लेने की प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी UNHCR के जरिए पूरी होती है। इसमें लंबा समय और कई स्तरों की जांच शामिल रहती है।
ये भी पढ़े : डॉ. सीपी राधाकृष्णन बने नए उपराष्ट्रपति, पीएम ने दी बधाई, जताया विश्वास
लेकिन राजनीतिक हस्तियों और बड़े नेताओं के मामले अलग होते हैं। उनके लिए सीधे सरकार के स्तर पर बातचीत की जाती है। कई बार दुबई जैसी जगहें उन्हें अस्थायी पनाह देती हैं और आगे हालात के अनुसार किसी तीसरे देश में भेजने का फैसला लिया जाता है।
क्यों चुनते हैं नेता दुबई का रास्ता?
दुबई कई बार विवादों में फंसे नेताओं और बिजनेसमैन का ठिकाना रहा है। यहां सुरक्षा मजबूत है और अंतरराष्ट्रीय संपर्क भी आसान रहता है। ऐसे में राजनीतिक संकट से जूझ रहे कई देशों के नेता वहां अस्थायी रूप से रहना पसंद करते हैं।

