Nepal Protest : नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद चीन ने लगभग 48 घंटे तक चुप्पी साधे रखी। बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहली बार प्रतिक्रिया दी।
चीन का रुख
लिन जियान ने कहा कि “चीन और नेपाल परंपरागत रूप से दोस्ताना पड़ोसी हैं। हमें उम्मीद है कि नेपाल की सभी पार्टियां घरेलू मसलों को सही तरीके से सुलझाएंगी और जल्द स्थिरता बहाल करेंगी।” उन्होंने यह भी बताया कि नेपाल में मौजूद चीनी नागरिक सुरक्षित हैं, हालांकि उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साथ ही काठमांडू से चीनी नागरिकों और संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।
चुप्पी क्यों साधी रही चीन?
चीन की चुप्पी ने कई सवाल खड़े किए हैं। ओली को हमेशा चीन समर्थक नेता माना जाता रहा है। हाल ही में वह तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन और चीन की विक्ट्री डे परेड में शामिल हुए थे। इसके बावजूद 9 सितंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों पर चीन ने न तो कोई बयान दिया, न ही सरकारी मीडिया ने विस्तार से कवरेज की।
विश्लेषण
माना जा रहा है कि चीन स्थिति को परख रहा था क्योंकि नेपाल में उसके कई बड़े प्रोजेक्ट्स और रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं। इसलिए वह प्रतिक्रिया देने में सावधानी बरत रहा था और अब केवल तटस्थ बयान जारी किया है

