Islamabad Talks News: ईरान और अमेरिका के बीच जिस शांति वार्ता से उम्मीदें जुड़ी थीं, वह पहले ही दौर में दम तोड़ती नजर आई। शनिवार को करीब 15 घंटे चली मैराथन बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके और वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत के विफल होने के लिए ईरान के रुख को जिम्मेदार ठहराया और संकेत दिए कि वह अमेरिका लौट सकते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किन मुद्दों पर अड़ गई बात और क्यों नहीं बन पाई सहमति।
2-3 प्रमुख बिंदुओं पर रहे मतभेद
ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बनने के बावजूद 2-3 अहम बिंदुओं पर मतभेद बने रहे, जिसके चलते वार्ता किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने बताया कि यह दौर करीब 24 से 25 घंटे तक चला, जो पिछले एक साल में सबसे लंबा रहा।बगाई ने कहा कि कूटनीति कभी खत्म नहीं होती, यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा का अहम जरिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राजनयिकों को युद्ध और शांति—दोनों परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
ईरान की प्रमुख शर्तें
- कोई हमला ना किया जाए, अमेरिका आक्रमकता ना दिखाए
- होमुर्ज पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा
- ईरान को यूरेनियम संवर्धन करने का अधिकार
- ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए अमेरिका
- यूएन ईरान के खिलाफ अपने प्रस्ताव वापस ले
- सभी द्वितीयक प्रतिबंधों से ईरान को मुक्त किया जाए
- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रस्ताव खारिज हों
- युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई हो
- अमेरिका अपने सभी सैनिक इस क्षेत्र से हटाए
- लेबनान और दूसरे मोर्चों पर तुरंत हमले रोके जाएं
जेडी वेंस ने क्या बताया?
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता भले ही नाकाम रही हो, लेकिन यह साफ है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की खाई अभी भी गहरी है। परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर सख्त रुख ने बातचीत को समझौते तक पहुंचने नहीं दिया। जेडी वेंस के बयान से भी स्पष्ट है कि अमेरिका अपनी ‘रेड लाइन’ पर कायम है, जबकि ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं। ऐसे में फिलहाल टकराव टलता नजर नहीं आ रहा, लेकिन कूटनीतिक कोशिशें जारी रहने की उम्मीद बनी हुई है।
इन बिंदुओं पर बनी असहमति
अमेरिका की सबसे बड़ी मांग थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करे। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान से जुड़े मुद्दे भी अमेरिकी शर्तों में शामिल थे। हालांकि, ईरान इन मांगों पर झुकने को तैयार नहीं दिखा और उसका रुख बेहद सख्त बना रहा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसी उद्देश्य से ये वार्ताएं की गई थीं।

