Donald Trump Iran comments: जी7 देशों के तीन अधिकारियों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक आभासी बैठक में जी7 नेताओं से कहा कि ईरान आत्मसमर्पण करने वाला है। इस बैठक के दौरान ट्रंप ने हाल ही में हुए सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के परिणामों पर चर्चा की और इसे एक बड़ी सफलता के रूप में पेश किया।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप ने जी7 नेताओं से कहा कि इस अभियान ने “एक ऐसे खतरे को खत्म कर दिया है जो सभी के लिए गंभीर था।” उन्होंने सहयोगी देशों को भरोसा दिलाया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के संभावित हमलों को निष्प्रभावी कर दिया है और क्षेत्र में उनकी सैन्य ताकत पर बड़ा झटका लगा है। ट्रंप ने इस अभियान के सकारात्मक परिणामों पर विशेष जोर दिया।
ईरान के ड्रोन हमले और जवाबी कार्रवाई
ईरान ने शुक्रवार तड़के खाड़ी अरब देशों को निशाना बनाते हुए सिलसिलेवार हमले किए, जिनमें सऊदी अरब को लक्षित ड्रोन हमले भी शामिल थे। ये हमले नए ईरानी सर्वोच्च नेता की चेतावनी के बाद हुए, जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय सरकारों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी न करने की धमकी दी थी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “देखिए आज इन विक्षिप्त बदमाशों का क्या होता है। ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है, उनकी वायु सेना का अस्तित्व समाप्त हो गया है, मिसाइलें, ड्रोन और बाकी सब कुछ नष्ट किया जा रहा है, और उनके नेता धरती से मिटा दिए गए हैं।”
मोजतबा खामेनेई की कड़ी चेतावनी
ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने की कसम खाई और संकेत दिया कि ईरान अमेरिका, इज़राइल और क्षेत्र में उनके सहयोगियों का सामना करना जारी रखेगा। अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करेगा और चेतावनी दी कि विरोधियों पर दबाव बढ़ाने के लिए इसे बंद रखना आवश्यक है।
खामेनेई ने मध्य पूर्व से सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को वापस बुलाने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सेना की उपस्थिति जारी रहती है तो और हमले हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तनाव बढ़ने की स्थिति में ईरान अतिरिक्त मोर्चे खोलने के लिए तैयार है, जिससे संघर्ष और गहरा सकता है।
क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका-ईरान समीकरण
हाल की घटनाओं ने मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हुई है, जबकि ईरान अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए तैयार दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, ईरानी ड्रोन हमले और अमेरिका के जवाबी उपायों के कारण खाड़ी देशों में सुरक्षा और तेल परिवहन पर असर पड़ सकता है। इस बीच, जी7 देशों के नेता ट्रंप की जानकारी पर विचार कर रहे हैं और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं।

