Iranian Students Hold Protests: ईरान में सत्ता के खिलाफ उठ रही आवाजें थमने का नाम नहीं ले रहीं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार को एक बार फिर आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी तेहरान में सोमवार को लगातार तीसरे दिन कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने खुलकर सरकार विरोधी प्रदर्शन किए। सोशल मीडिया पर इन प्रदर्शनों के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें छात्राएं ‘आजादी’ के नारे लगाती नजर आ रही हैं।
तीसरे दिन भी नहीं थमा आंदोलन
यह आंदोलन बीते सप्ताहांत शुरू हुआ था, जो सोमवार को और उग्र हो गया। समाचार एजेंसी AP के मुताबिक, कम से कम तीन विश्वविद्यालयों में छात्रों ने प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर ईरान के अर्धसैनिक बल बसिज और छात्रों के बीच टकराव की खबरें भी सामने आईं।
शाही झंडा और पहलवी के नारे
शरीफ यूनिवर्सिटी में छात्र दोपहर के समय कैंटीन के बाहर इकट्ठा हुए। कई छात्र मास्क पहने हुए थे और ताली बजाते हुए नारे लगा रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ईरान का पुराना शाही झंडा लहराया और निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए। इसी दौरान बसिज कर्मियों और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई, हालांकि विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने हालात को संभालने की कोशिश की।
औरत, जिंदगी, आजादी का नारा
तेहरान यूनिवर्सिटी में पहले के प्रदर्शनों में मारे गए छात्रों की याद में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। छात्रों ने जोर-जोर से “औरत, जिंदगी, आजादी” के नारे लगाए और सुप्रीम लीडर को हटाने की मांग की। कुछ छात्रों का दावा है कि झड़प के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया।
छात्राओं का जोरदार विरोध
केवल छात्राओं के लिए बनी अल जहरा यूनिवर्सिटी में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। यहां छात्राओं ने बड़ी संख्या में जुटकर सरकार विरोधी नारे लगाए और पहलवी के समर्थन में आवाज बुलंद की।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच उबाल
ये प्रदर्शन ऐसे वक्त हो रहे हैं, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर परमाणु समझौते को लेकर दबाव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत असफल रही तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि किसी भी हमले का “कठोर जवाब” दिया जाएगा। गुरुवार को जिनेवा में दोनों पक्षों के बीच बातचीत का अगला दौर प्रस्तावित है।
मौतों के आंकड़ों पर विवाद
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, हालिया प्रदर्शनों और सरकारी कार्रवाई में 7,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें सैकड़ों सुरक्षाबल के सदस्य भी शामिल हैं। हालांकि ईरानी सरकार ने इससे कहीं कम आंकड़े जारी किए हैं। पहले भी सरकार पर मौतों की संख्या कम बताने के आरोप लगते रहे हैं।
बड़ा सवाल: क्या डर टूट रहा है?
ईरान में बार-बार भड़क रहे छात्र आंदोलन और खासतौर पर छात्राओं की खुली भागीदारी यह सवाल खड़ा कर रही है क्या खामेनेई सरकार का डर अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है? फिलहाल इतना तय है कि ‘आजादी’ की यह चिंगारी ईरान की राजनीति को आने वाले दिनों में और ज्यादा अस्थिर कर सकती है।
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली डील? मोदी-नेतन्याहू की मुलाकात से पहले हेक्सागन एलायंस पर बड़ा सस्पेंस

