Donald Trump Tariff Threat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मोर्चे पर चुपचाप बड़ा खेल कर दिखाया है। तमाम दबावों के बीच भारतीय निर्यात में गिरावट के बजाय बढ़त दर्ज की गई है, जिसने यह संकेत दे दिया है कि टैरिफ का असर भारत की निर्यात क्षमता पर सीमित रहा है।
क्या बताते है आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 1.87 प्रतिशत की बढ़त के साथ 38.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, इसी अवधि में आयात में तेज इजाफा होने से व्यापार घाटा भी बढ़ा है। दिसंबर में इंपोर्ट 8.7 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब डॉलर रहा, जिससे ट्रेड डेफिसिट 25.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत का कुल निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 5.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 578.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस नौ महीने की अवधि में देश का कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर रहा।
भारत का निर्यात रुझान
कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और टैरिफ दबाव के बावजूद भारत का निर्यात रुझान सकारात्मक बना हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात (सामान और सेवाएं मिलाकर) 850 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर इस बढ़त के प्रमुख कारण रहे हैं।
भारत का निर्यात लगातार बढ़ाबढ़ा
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका, चीन और UAE जैसे बड़े बाजारों में भारत का निर्यात लगातार बढ़ा है। अप्रैल-दिसंबर 2026 के दौरान अमेरिका को भारत का निर्यात सालाना आधार पर करीब 9.8 प्रतिशत बढ़कर 65.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया है, जिससे टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी सेक्टर पर असर पड़ा, लेकिन इसके बावजूद भारत ने एक्सपोर्ट फ्रंट पर मजबूती दिखाई है। यही वजह है कि अब टैरिफ के डर के बजाय भारत की रणनीति और बढ़ती वैश्विक मौजूदगी पर चर्चा तेज हो गई है।

