India US relationship : चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला,जब भारत, चीन और रूस तीन वैश्विक शक्तियों के नेताओं की मुलाकात हुई. इस त्रिपक्षीय संवाद के बीच भारत में अमेरिकी दूतावास द्वारा किया गया एक ट्वीट न केवल इसकी टाइमिंग, बल्कि इसके संदेश के चलते भी चर्चा में है.
तीन वैश्विक महाशक्तियों की एक मंच पर मुलाकात
सोमवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गर्मजोशी से मुलाकात हुई. इसी दौरान भारत में अमेरिकी दूतावास की ओर से एक अहम बयान जारी किया गया,जिसमें भारत-अमेरिका साझेदारी को 21वीं सदी का एक निर्णायक रिश्ता बताया.
दूतावास ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है. यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच की स्थायी मित्रता ही है जो इस यात्रा को ऊर्जा प्रदान करती है. इस बयान में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भी हवाला दिया गया, जिन्होंने कहा, भारत और अमेरिका के लोगों के बीच गहरी दोस्ती हमारे संबंधों का आधार है.
भारत को लेकर सख्त बयान
विशेषज्ञों का मानना है कि SCO सम्मेलन के दौरान तीन महाशक्तियों की यह मुलाकात अमेरिका को रणनीतिक तौर पर सोचने पर मजबूर कर रही है. यह स्थिति खास तौर पर इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी तक के भारी टैरिफ लगाए थे और उनके रणनीतिकारों ने भारत को लेकर सख्त बयान दिए थे.
सामरिक संदेश क्या है?
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और वैश्विक संतुलन साधने की कोशिशों ने वाशिंगटन को फिर से अपने रुख पर विचार करने को मजबूर किया है. SCO के मंच पर भारत, चीन और रूस की एकजुटता अमेरिका के लिए एक स्पष्ट संकेत हो सकता है कि भारत अब केवल पश्चिमी ध्रुव पर निर्भर नहीं रहना चाहता.

