India Russia New Space Stations: भारत और रूस ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि उनके भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन रशियन ऑर्बिटल स्टेशन (ROS) और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को एक ही 51.6° झुकाव वाली कक्षा में रखा जाएगा। यह वही कक्षा है जिसमें आज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) घूमता है। इसका उद्देश्य है कि दोनों देशों के अंतरिक्ष यात्री आसानी से एक-दूसरे के स्टेशन पर जा सकें, वैज्ञानिक प्रयोग कर सकें और आपातकालीन स्थिति में मदद ले सकें।
रोस्कोस्मोस प्रमुख दमित्री बकानोव ने नई दिल्ली दौरे के दौरान बताया कि इस कदम से दोनों देशों को आर्थिक, तकनीकी और वैज्ञानिक लाभ मिलेगा। पहले रूस अपने ROS के लिए 96° झुकाव वाली कक्षा सोच रहा था, लेकिन अब भारत के BAS के अनुरूप 51.6° पर सहमति बनी है।
कब-कब होंगे लॉन्च
ROS का निर्माण एनर्जिया द्वारा किया जाएगा। पहला वैज्ञानिक और पावर मॉड्यूल 2028 में लॉन्च होगा, बाकी चार मुख्य मॉड्यूल 2030 तक और अतिरिक्त मॉड्यूल 2031-33 में जोड़े जाएंगे। BAS का निर्माण ISRO 2035 तक पूरा करने की योजना में है। भारत ने हाल ही में स्पेस डॉकिंग तकनीक हासिल कर दुनिया में चौथे स्थान पर आ गया है। 51.6° झुकाव की कक्षा से सोयूज रॉकेट और गगनयान मिशन आसानी से डॉकिंग कर सकेंगे। इससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यात्रा आसान होगी, सहयोग मजबूत होगा, आपातकालीन बचाव संभव होगा और संयुक्त वैज्ञानिक प्रयोगों से चंद्रमा, मंगल और एस्टेरॉयड मिशनों में मदद मिलेगी।
पुरानी है दोस्ती
भारत-रूस का अंतरिक्ष सहयोग नया नहीं है। पहला भारतीय सैटेलाइट आर्यभट्ट, चंद्रयान-2 और गगनयान मिशन में रूस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस नए समझौते के बाद 2030 के दशक में भारत-रूस का अंतरिक्ष कॉरिडोर बन सकता है, जो वैश्विक तकनीकी और रणनीतिक संतुलन में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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