Iran Israel US War: मध्य-पूर्व में भड़की भीषण जंग ने वैश्विक तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष में अमेरिका की भूमिका ने हालात को और जटिल बना दिया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नाम तेजी से उभर रहा है, नरेंद्र मोदी। दुनिया के कई नेता और रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह जंग अगर कोई रोक सकता है, तो वह भारत ही है।
वैश्विक मंच से उठी भारत की मांग
हाल ही में अलेक्जेंडर स्टब ने रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान भारत की कूटनीतिक ताकत की खुलकर सराहना की। उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा हालात में युद्धविराम बेहद जरूरी है और भारत इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। स्टब का मानना है कि नई दिल्ली पर दोनों पक्षों का भरोसा है और भारत की संतुलित विदेश नीति उसे एक प्रभावी मध्यस्थ बनाती है।
अमेरिका से भी आई सलाह
सिर्फ यूरोप ही नहीं, अमेरिका से भी ऐसी ही आवाजें उठ रही हैं। पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी और रणनीतिकार डगलस मैकग्रेगर ने डोनाल्ड ट्रंप को सलाह दी है कि वे इस संकट से बाहर निकलने के लिए भारत का सहारा लें। मैकग्रेगर ने चेतावनी दी कि युद्ध लंबा खिंचने पर तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। उनके मुताबिक, भारत ही ऐसा देश है जो बिना किसी पक्षपात के सभी देशों से संवाद कर सकता है।
UAE के पूर्व राजदूत का बड़ा बयान
हुसैन हसन मिर्जा, जो भारत में UAE के पूर्व राजदूत रह चुके हैं, उन्होंने भी कहा कि PM मोदी इस जंग को रोकने के लिए सबसे उपयुक्त नेता हैं। उनका मानना है कि अगर मोदी, बेंजामिन नेतन्याहू और ईरानी नेतृत्व से सीधे बात करें, तो हालात में तुरंत बदलाव आ सकता है।
भारत क्यों है सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ?
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी “संतुलित कूटनीति” है। भारत के इजराइल के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं वहीं ईरान के साथ ऊर्जा और व्यापारिक रिश्ते भी गहरे हैं इसके अलावा, भारत लंबे समय से गुटनिरपेक्ष नीति पर कायम रहा है, जिससे उसकी छवि एक निष्पक्ष देश की बनी हुई है। इसके उलट चीन ने मध्यस्थता की पेशकश जरूर की है, लेकिन उसका झुकाव ईरान की ओर माना जाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
पहले भी सक्रिय हो चुके हैं PM मोदी
तनाव बढ़ने के बाद नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत की थी और क्षेत्रीय स्थिति पर चिंता जताई थी। इसके अलावा उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू से भी चर्चा कर साफ किया कि भारत इस संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए चाहता है।
तेल संकट और वैश्विक खतरा
इस जंग का असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आ रहा है। ईरान ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा।
क्या सच में एक कॉल से थम जाएगी जंग?
यह सवाल अब पूरी दुनिया के सामने है। क्या नरेंद्र मोदी की कूटनीति इस भयंकर संघर्ष को रोक पाएगी? हालात बेहद नाजुक हैं, लेकिन जिस तरह से वैश्विक नेता भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं, उससे साफ है की इस जंग का अगला मोड़ नई दिल्ली से तय हो सकता है।
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