India-Indonesia BrahMos Missile Deal: भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की ताकत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए समझौते को मंजूरी दे दी है। यह डील दोनों देशों के बीच कई महीनों से चल रही बातचीत के बाद तय हुई है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रिको रिकार्डो सिरैत ने इस विकास की पुष्टि करते हुए बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को खरीदने का निर्णय देश की सैन्य क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सौदे की अनुमानित कीमत लगभग 200 मिलियन से 350 मिलियन डॉलर के बीच बताई जा रही है।
दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
दरअसल, ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तहत किया जाता है। यह दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है और अपनी उच्च गति, सटीक निशानेबाजी और कई प्लेटफॉर्म से लॉन्च होने की क्षमता के कारण बेहद प्रभावी मानी जाती है। इंडोनेशिया इस मिसाइल सिस्टम को अपनी रक्षा रणनीति को आधुनिक बनाने के लिए शामिल करना चाहता है। खासतौर पर समुद्री और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ब्रह्मोस को एक अहम हथियार माना जा रहा है।
तेज रफ्तार और सटीकता
हाल ही में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत का प्रदर्शन किया था। यह ऑपरेशन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद चलाया गया था, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में आतंकी ठिकानों और सैन्य ढांचों को निशाना बनाया गया। इस अभियान में ब्रह्मोस मिसाइलों को मुख्य आक्रामक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया। इन्हें खास तौर पर संशोधित सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया गया था। मिसाइल की तेज रफ्तार और सटीकता की वजह से दुश्मन के कई महत्वपूर्ण ठिकानों, जैसे रनवे, कमांड सेंटर और मजबूत सैन्य ढांचे को निष्क्रिय करने में सफलता मिली।
दुनिया के सामने मजबूती से पेश
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस के प्रभावी इस्तेमाल ने भारत की रणनीतिक सैन्य क्षमता को दुनिया के सामने मजबूती से पेश किया है। यही कारण है कि अब कई देश इस अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इंडोनेशिया के साथ संभावित यह डील भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
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