UN New York Declaration 2025 : संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास करते हुए फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को समाप्त करने के लिए दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का समर्थन किया. इस प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 142 देशों ने मतदान किया, जबकि 10 देशों ने इसका विरोध किया और 12 ने वोटिंग में भाग नहीं लिया.
न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन को मिली मंजूरी
न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन नामक इस प्रस्ताव को फ्रांस और सऊदी अरब के नेतृत्व में तैयार किया गया था. यह प्रस्ताव जुलाई में आयोजित एक उच्च-स्तरीय सम्मेलन के बाद सामने आया, जिसमें दो-राष्ट्र समाधान को लागू करने की दिशा में ठोस कदमों की रूपरेखा तय की गई थी. डिक्लेरेशन के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं:
- गाजा में युद्धविराम के बाद पूरे फिलिस्तीनी क्षेत्र का प्रशासन फिलिस्तीनी अथॉरिटी को सौंपना
- गाजा में हमास के शासन का अंत और उनके हथियारों को फिलिस्तीनी अथॉरिटी को सौंपना
- फिलिस्तीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक अस्थायी अंतरराष्ट्रीय मिशन की तैनाती
भारत का स्पष्ट समर्थन
भारत ने इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया, जो फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की भारत की दशकों पुरानी नीति के अनुरूप है. संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीनी राजदूत रियाद मंसूर ने भारत समेत अन्य देशों के समर्थन को शांति की उम्मीद बताया. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव पूरी दुनिया की उस ख्वाहिश को दर्शाता है, जो शांति के रास्ते को खोलना चाहती है.
इजरायल और अमेरिका ने जताया कड़ा विरोध
दूसरी ओर इजरायल ने प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों को लेकर हुए एक समझौते के दौरान कहा कि यहां कोई फिलिस्तीनी राष्ट्र नहीं होगा. यह जमीन हमारी है. इजरायल के संयुक्त राष्ट्र राजदूत डैनी डैनन ने इस प्रस्ताव को राजनीतिक नाटक बताया और आरोप लगाया कि यह हमास को फायदा पहुंचाने की कोशिश है. अमेरिका ने भी प्रस्ताव का विरोध किया. अमेरिकी मिशन की काउंसलर मॉर्गन ऑरटागस ने इसे गलत समय पर किया गया प्रचार स्टंट बताया और कहा कि यह प्रस्ताव हमास को तोहफा है.
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अब क्या होगा आगे…
डिक्लेरेशन में 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल के नागरिकों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई है, जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए थे और 250 से अधिक को बंधक बनाया गया था. साथ ही, गाजा में इजरायल द्वारा किए गए हमलों, घेराबंदी और भुखमरी की नीति की भी आलोचना की गई है, जिनमें फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार अब तक 64,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. फिलिस्तीनी राजदूत मंसूर ने उम्मीद जताई कि 22 सितंबर से शुरू हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक में कम से कम 10 और देश फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देंगे. वर्तमान में 145 से अधिक देश पहले ही ऐसा कर चुके हैं.

