Benjamin Netanyahu India alliance: इजराइल के प्रधानमंत्री द्वारा भारत सहित कुछ देशों के साथ एक नए रणनीतिक गठबंधन के संकेत देने के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस प्रस्ताव को इस्लामाबाद ने मुस्लिम देशों की एकता के खिलाफ बताया है और इसे लेकर संसद के उच्च सदन में औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है।
पाकिस्तानी सीनेट का प्रस्ताव
पाकिस्तान की सीनेट ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर बेंजामिन नेतन्याहू की कथित ‘षट्कोणीय गठबंधन’ योजना की निंदा की। प्रस्ताव में कहा गया कि यह पहल मुस्लिम उम्माह की एकता को वैचारिक आधार पर कमजोर करने का प्रयास है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सांसद पलवाशा मोहम्मद जै खान ने सभी दलों की ओर से पेश किया। पीपीपी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का अहम घटक है। प्रस्ताव में इजराइल की नीतियों और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में की जा रही कार्रवाइयों पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज की गई।
क्षेत्रीय स्थिरता पर चिंता
सीनेट के प्रस्ताव में कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाकों, विशेषकर पवित्र स्थलों की स्थिति में बदलाव के किसी भी प्रयास को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया गया। इसमें कहा गया कि ऐसे बयान और कदम क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि मुस्लिम देशों की सामूहिक पहचान और अखंडता को राजनीतिक एजेंडे के तहत विभाजित करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है। ‘उम्माह’ शब्द का प्रयोग करते हुए प्रस्ताव में मुस्लिम समुदाय की एकजुटता पर जोर दिया गया।
सोमालिलैंड मुद्दे पर प्रतिक्रिया
सीनेट ने इजराइल द्वारा सोमालिलैंड को कथित रूप से स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की भी आलोचना की। इसे अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों और क्षेत्रीय संप्रभुता के विरुद्ध बताया गया। पाकिस्तान ने एक बार फिर फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन दोहराया और कहा कि किसी भी एकतरफा कदम से मध्य पूर्व की स्थिति और जटिल हो सकती है।
नेतन्याहू का ‘षट्कोणीय गठबंधन’ विचार
इज़राइली प्रधानमंत्री ने हाल ही में एक बयान में कहा कि उनका देश मध्य पूर्व और उससे बाहर ऐसे देशों के साथ सहयोग का नया ढांचा तैयार करना चाहता है, जो कट्टरपंथी ध्रुवों के बजाय साझा हितों और वास्तविकताओं पर आधारित दृष्टिकोण रखते हों। उन्होंने संभावित साझेदारों में भारत, ग्रीस और ग्रीक साइप्रस प्रशासन का नाम लिया, साथ ही कुछ अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों का भी उल्लेख किया। यह बयान नरेंद्र मोदी की तेल अवीव यात्रा से पहले आया था।
ईरान और चरमपंथी संगठनों का संदर्भ
नेतन्याहू ने प्रस्तावित गठबंधन को ईरान और उसके सहयोगी संगठनों जैसे हमास, हिजबुल्लाह और हौथी के नेतृत्व वाली कट्टरपंथी शिया धुरी के संतुलन के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने आईएसआईएस से जुड़े अवशेषों को उभरती कट्टरपंथी सुन्नी धुरी बताया। उनके अनुसार, यह नया सहयोग ढांचा उन देशों को एक मंच पर लाने का प्रयास है जो क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दों पर समान सोच रखते हैं।
बढ़ता कूटनीतिक तनाव
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना के साथ-साथ तनाव भी बढ़ा दिया है। पाकिस्तान का कड़ा विरोध दर्शाता है कि यह मुद्दा केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय और वैचारिक आयाम रखता है।

