होम = State = उत्तराखंड = उत्तराखंड में अस्तित्व की लड़ाई : बद्रीनाथ में मास्टर प्लान के खिलाफ सिर मुंडवाकर प्रदर्शन

उत्तराखंड में अस्तित्व की लड़ाई : बद्रीनाथ में मास्टर प्लान के खिलाफ सिर मुंडवाकर प्रदर्शन

Badrinath Master Plan : उत्तराखंड में सरकार अलग-अलग तरह की परियोजना लेकर आ रही है जिनको आपदाओं का कारण भी बताया जा रहा है। इसी को देखते हुए वहां के लोग सरकार की किसी भी तरह की योजना से अपने गांव को बचाना चाहते हैं। उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान को लेकर स्थानीय लोग और व्यापारियों का विरोध तेज होता जा रहा है। बीते 15 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे प्रसाद विक्रेता, होटल–रेस्टोरेंट संचालक और स्थानीय लोग सोमवार को सिर मुंडवाकर सड़क पर उतर आए। इस दौरान उन्होंने करीब तीन घंटे तक कारोबार बंद रखा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जिसमें बड़े- बच्चे महिलाएं भी शामिल रहीं। उनका कहना है कि विकास और विनाश के बीत छोटी सी परत होती है। सरकार अपनी गरिमा को बनाकर रखें। इससे पहले भी उत्तराखंड के निवासी अपनी भूमि के लिए सड़कों पर उतरे हैं चाहे चिपको आंदोलन हो या टीहरी डेम की योजना को रोकने का आंदोलन वहां लोग हमेशा प्रकृति से खेलने वालों के खिलाफ आवाज उठाते हैं।

सरकार की 500 करोड़ की योजना

जानकारी के लिए आपको बता दें कि राज्य सरकार ने केदारनाथ की तर्ज पर बद्रीनाथ में भी मास्टर प्लान लागू किया है। इस योजना के तहत मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में व्यापक पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण के काम किए जा रहे हैं। लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे इस प्रोजेक्ट के जरिए सरकार का दावा है कि बद्रीनाथ धाम को अधिक भव्य और सुविधाजनक बनाया जाएगा। इसके लिए कुछ घरों और दुकानों को तोड़ा भी गया है। लेकिन स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का कहना है कि यह योजना उनके अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही है। आंदोलन कर रहे लोगों का आरोप है कि मास्टर प्लान की आड़ में उनकी आजीविका छीन ली जा रही है। प्रसाद विक्रेताओं और दुकानदारों का कहना है कि उन्हें किसी तरह का ठोस विकल्प नहीं दिया गया और बिना सहमति के तोड़फोड़ की गई है।

सिर मुंडवाकर विरोध जताया

होटल–रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि धाम को भव्य बनाने की आड़ में उनकी पीढ़ियों से चल रही दुकानों और होटलों को उजाड़ा जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि धार्मिक स्थल का विकास आवश्यक है, लेकिन इसमें स्थानीय लोगों की आजीविका की सुरक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए। आंदोलनकारी व्यापारियों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। फिलहाल सिर मुंडवाकर विरोध जताने के बाद उन्होंने चेतावनी दी है कि अगला कदम सड़क पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और भूख हड़ताल हो सकता है।

उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था

उधर, सरकार का कहना है कि बद्रीनाथ मास्टर प्लान का उद्देश्य तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना और धाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वरूप प्रदान करना है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है। फिलहाल आंदोलन और सरकार की सख्त नीति के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोग इसे अपनी “अस्तित्व की लड़ाई” बता रहे हैं और सरकार अपने विकास के दावे पर अड़ी हुई है। अब देखना होगा कि इस टकराव का अंत संवाद से होता है या फिर यह आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।

ये भी पढ़े : ग्रेटर नोएडा बाढ़ संकट! हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी ने बढ़ाई यमुना की रफ्तार, हजारों बीघा जमीन डूबी