Mysterious Temples : हाईटेक दौर में जहां एआई हर सवाल का जवाब दे देता है, वहीं भारत के 5 रहस्य ऐसे हैं जो आज भी विज्ञान के लिए अनसुलझी पहेली बने हुए हैं।

कोणार्क मंदिर
ओडिशा के पुरी जिले में बना कोणार्क मंदिर अद्भुत तरीके से समय भी बताता है। 13वीं सदी में बने इस दिव्य मंदिर में सूर्य के रथ के आकार के पहिये लगे हैं। ये पहिये सिर्फ सजावट के प्रतीक नहीं है बल्कि आश्चर्यजनक सटीकता के साथ समय भी बताते हैं। विद्वान यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि पहियों के जरिए आखिर हम सटीक समय कैसे पता लगा सकते हैं|

बृहदेश्वर मंदिर
तमिलनाडु के तंजावुर जिले में एक मंदिर है, जिसका शिखर 200 फुट ऊँचा है। इसके ऊपर एक विशाल पत्थर इस तरह रखा गया है कि देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। उस समय बिना मशीनरी के इसे शिखर पर कैसे पहुँचाया गया, यह आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है।

जगन्नाथ मंदिर
सामान्य तौर पर ऊँची इमारतों या खंभों पर लगे झंडे हवा के विपरीत दिशा में लहराते हैं। लेकिन ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर के शिखर का झंडा हमेशा उसी दिशा में लहराता है, जहां से हवा आ रही होती है। यह आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य है और कुदरत का अद्भुत करिश्मा माना जाता है।

कैलास मंदिर
आज के समय में पत्थर काटकर मंदिर या इमारत बनाना आम बात है। लेकिन सैकड़ों साल पहले जमीन के नीचे दबी एक विशाल चट्टान को काटकर पूरा मंदिर बनाया गया। इसके लिए 4 लाख पत्थर निकाले गए। मूर्तिकारों ने बिना कोई गलती किए यह असंभव काम कैसे किया, यह आज भी सबको हैरान करता है।

मीनाक्षी मंदिर
तमिलनाडु के मदुरै में मीनाक्षी मंदिर का निर्माण लगभग ढाई हजार साल पहले हुआ था। इसकी नक्काशी इतनी शानदार है कि लगता है जैसे यह पत्थर पर साधना हो रही हो। बिना किसी मशीन के, इतनी ऊंचाई पर चढ़कर कारीगरों ने यह काम कैसे किया, यह हर आगंतुक के लिए एक बड़ा रहस्य है।
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