घटना के  19 साल बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष के पास आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं थे इसलिए उन्हें बरी किया जाता है. बरी किए गए आरोपियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया है