Mansa Devi Temple : उत्तराखंड के धार्मिक नगरी हरिद्वार में स्थित प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में रविवार की सुबह एक दुखद घटना घटी जब भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई है जबकि कई श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, मंदिर परिसर में असामान्य रूप से भारी भीड़ के कारण यह दुर्घटना हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। जिला प्रशासन ने स्थिति पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया है और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन उपाय किए हैं।
आस्था का प्रतीक, हर मुराद पूरी करती हैं मां मनसा!
आपको बता दें कि मनसा देवी मंदिर में आज भारी संख्या में भक्त पहुंच गए थे जिसकी वजह से वहां भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ हुई है। चलिए जानते हैं कि मनसा देवी का धार्मिक महत्व क्या है। आखिर क्यों इतने भक्त यहां पहुंचते हैं। हरिद्वार में स्थित मनसा देवी मंदिर उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर हिमालय की शिवालिक पर्वत श्रृंखला के बिल्वा पर्वत पर स्थित है और हरिद्वार शहर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है। हिंदू धर्म में इस मंदिर का विशेष महत्व है और इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
जानिए इतिहास, मान्यता और चमत्कार
मनसा देवी मंदिर का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक गहरा है। यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने वाली देवी के रूप में प्रसिद्ध है। इसका नाम ‘मनसा’ शब्द से आया है, जिसका अर्थ है ‘मन की इच्छा’। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस मंदिर में आकर माता के दर्शन करता है और अपनी इच्छा व्यक्त करता है, माता मनसा देवी उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करती हैं।
जानिए पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मनसा देवी भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री हैं। कहा जाता है कि इनका प्रादुर्भाव शिव के मन (मस्तक) से हुआ, इसलिए इन्हें ‘मनसा’ कहा जाता है। मंदिर में माता मनसा देवी की पूजा की जाती है, जो मां दुर्गा का एक रूप मानी जाती हैं। यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोपवे की व्यवस्था भी उपलब्ध है।
मृतकों के परिवारों को मुआवजे की घोषणा
इस दुखद घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने मंदिर में भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की समीक्षा करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है और मृतकों के परिवारों को मुआवजे की घोषणा की गई है। इससे पहले कुंभ भगदड़ में कई भक्तों ने अपनी जान गवाई है। लेकिन इन सब में हमें ये समझना बहुत जरूरी है कि कब और कहां कैसे जाना है।
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