Dharali : उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में 5 अगस्त को हुई बाढ़ और मलबे की तबाही के नौवें दिन भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। लगातार हो रही भारी बारिश, टूटी हुई संचार व्यवस्था और उड़ान नहीं भर पाने वाले हेलिकॉप्टरों ने बचाव काम को बेहद मुश्किल बना दिया है। हैलीपैड तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है, हेलीकॉप्टर उतरने में मुश्किले ऐ रही है इस वजह से रेस्क्यू टीमों को जमीन से बाहर से सहायता करनी पड़ रही है।
प्राकृतिक और तकनीकी अड़चनें
लगातार मूसलाधार बारिश, दृश्यमानता (visibility) का अभाव, कीचड़, मलबे और भूस्खलन इन सबने बचाव टीमों के हर कदम पर बाधाएं पैदा की हैं। हेलिकॉप्टर तैयार तो हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण उड़ान शुरू नहीं हो पा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग और पुल मलबे की चपेट में आ गए हैं। BRO और अन्य टीमें मार्ग खोलने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन बरकरार बारिश एवं लगातार भूस्खलन के कारण काम मुश्किल हो रहा है।
संचार तंत्र पूरी तरह खराब
मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह बाधित हो चुका है। केवल सेटेलाइट फोन से ही संपर्क संभव है, जिससे बचाव कार्यों में समन्वय में भारी कमी आ रही है।
लापता और फंसे हुए लोगों की संख्या
भूमि और बुनियादी ढांचे के भारी नुकसान के कारण जानकारी एकत्र करना मुश्किल है। हालांकि, सरकार ने औपचारिक तौर पर अब तक 43 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है लेकिन स्थानीय अनुमान इससे कहीं अधिक हैं। अब तक 356 हेलिकॉप्टर उड़ाने भारी जा चुकी है, जिनके जपिए 1308 लोगों को निकाला गया है।
कई टीमें बचाव कार्य में जुटी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियाँ सेना, NDRF, SDRF, ITBP—बचाव कार्य में जुटी हैं। कुछ राहत सामग्री हेलीकॉप्टर और वाहनों से पहुंचाई जा रही है, और हर्षिल में बनाई जा रही अस्थायी पुल से कनेक्टिविटी बहाल की जा रही है। सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा पुल का निर्माण अंतिम चरण में है, शीघ्र ही क्षेत्र में सड़क संपर्क बहाल होने की संभावना है। इसके अलावा 110 गाड़ियां और 21 भारी मशीनें मलबा हटाने और रास्ता साफ करने में लगी है। भागीरथी नदी में जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए UJVNL और SDRF की टीमें काम कर रही हैं।
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धराली एवं आसपास के क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान अब तक प्रभावी रहा है, लेकिन प्राकृतिक बाधाएं जैसे रुक-रुक कर हो रही बारिश, टूटे पुल, मलबा और संचार न होने ने इसे बहुत मुश्किल बना दिया है। सरकार, सेना और एजेंसियाँ बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं वहीं वैज्ञानिक भी भविष्य के लिए सुधार हेतु क्षेत्रीय अध्ययन कर रहे हैं। स्थानीय लोग और यात्री दोनों ही राहत और पुन स्थापना अभियान के कार्यान्वयन की उम्मीद कर रहे हैं।

