UP News: उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद के सकलडीहा तहसील क्षेत्र के जामडीह गांव में स्थित जामेश्वर महादेव मंदिर आज भी आस्था का प्रतीक बना हुआ है। करीब दो सौ वर्ष पुराना यह मंदिर अपने जुड़वा शिवलिंग के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने वाले निःसंतान दंपतियों की झोली संतान सुख से भर जाती है।
हर वर्ष भाई दूज और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। महिलाएं तालाब में स्नान कर जामेश्वर नाथ के जुड़वा शिवलिंग का जलाभिषेक करती हैं और पुत्र प्राप्ति की कामना करती हैं। जब मन्नत पूरी हो जाती है, तो महिलाएं अपने बच्चों के साथ पुनः यहां आती हैं, स्नान करती हैं और अपने पुराने वस्त्र वहीं छोड़कर बाबा का आशीर्वाद लेकर जाती हैं।
क्या है रहस्यमयी कथा
मंदिर से जुड़ी कथा भी उतनी ही रहस्यमयी है। बताया जाता है कि गाजीपुर जिले के सराय पोस्ता स्टीमर घाट निवासी सुखलाल अग्रहरी लगभग दो सौ वर्ष पहले अपने रिश्तेदारों से मिलने चंदौली आए थे। जामडीह गांव में एक पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम के दौरान उन्हें भगवान शिव का स्वप्नदर्शन हुआ। स्वप्न में आदेश मिला कि उसी स्थान पर खुदाई कर मंदिर का निर्माण किया जाए।
सुखलाल ने खुदाई कराई तो जमीन के भीतर से जुड़वा शिवलिंग निकले। उन्होंने उसे गाजीपुर ले जाने की कोशिश की, परंतु शिवलिंग अपने स्थान से हिल तक नहीं पाए। इसे भगवान की इच्छा मानकर सुखलाल ने वहीं मंदिर की स्थापना कर दी। चमत्कार यह हुआ कि मंदिर निर्माण के बाद सुखलाल को तीन पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई।

श्रद्धालु की खूब भरी भीड़
आज भी सुखलाल अग्रहरी के वंशज हर साल परिवार सहित यहां दर्शन करने आते हैं। कहा जाता है कि काशी विश्वनाथ, मार्कंडेय महादेव और कालेश्वर महादेव के दर्शन के बाद भक्त जामडीह के जुड़वा शिवलिंग जामेश्वर महादेव के दर्शन के लिए अवश्य आते हैं।
बिहार के करवंदिया से आई एक श्रद्धालु महिला ने बताया कि पांच वर्षों तक संतान न होने के बाद जामेश्वर नाथ के दर्शन से उसे एक नहीं, दो पुत्र प्राप्त हुए।
आज भी इस मंदिर परिसर का वही पीपल का पेड़ साक्षी है, जिसके नीचे सुखलाल अग्रहरी को स्वप्न में भगवान शिव का दर्शन हुआ था, और यहीं से शुरू हुई थी आस्था के चमत्कार की यह पावन कथा।
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