होम = State = उत्तर प्रदेश = कोहरे में टकराती रहीं गाड़ियां, आग का तांडव और जिंदा जलते लोग… यूपी यमुना एक्सप्रेसवे पर 13 जिंदगियां खत्म, जाने अंदरूनी कहानी

कोहरे में टकराती रहीं गाड़ियां, आग का तांडव और जिंदा जलते लोग… यूपी यमुना एक्सप्रेसवे पर 13 जिंदगियां खत्म, जाने अंदरूनी कहानी

Yamuna Expressway Accident: उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे पर तड़के हुए एक दिल दहला देने वाले हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। घने कोहरे, तेज रफ्तार और आपसी बहस ने ऐसा खौफनाक मंजर रचा कि चंद मिनटों में 13 लोग जिंदा जल गए और 100 से ज्यादा यात्री घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि करीब 70 मीटर तक एक्सप्रेसवे आग की लपटों में घिर गया।

बहस से शुरू हुआ मौत का सिलसिला

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हादसा सुबह करीब 4:30 बजे हुआ। सबसे पहले दो कारों की आपस में टक्कर हुई। टक्कर के बाद दोनों कारों के चालक सड़क पर उतरकर बहस करने लगे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक टेंपो ट्रैवलर ने इन वाहनों को टक्कर मार दी। इसके बाद पीछे से आ रही बसें एक के बाद एक भिड़ती चली गईं और देखते ही देखते पूरा इलाका भीषण हादसे की चपेट में आ गया।

आग की लपटों में घिरीं बसें, सोते रहे यात्री

हादसे में एक रोडवेज बस, सात स्लीपर डबल डेकर बसें और एक कार आग की चपेट में आ गईं। अधिकतर यात्री नींद में थे और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। बसों में सीटें पूरी तरह भरी थीं और यात्रियों का सामान भी रखा हुआ था, जिससे आग और तेजी से फैलती चली गई। कुछ ही पलों में आग इतनी भयानक हो गई कि आसपास 10 मीटर के दायरे में मौजूद सब कुछ जलकर राख हो गया।

इमरजेंसी खिड़की बनी मौत का कारण

यात्रियों ने जान बचाने के लिए बसों में लगी इमरजेंसी खिड़कियों से निकलने की कोशिश की, लेकिन ये खिड़कियां बेहद छोटी और ऊंचाई पर थीं। घबराए यात्री बाहर नहीं निकल सके। आग भड़कती गई और पर्दों व सामान ने आग को और खतरनाक बना दिया। बाद में लोगों ने शीशे तोड़कर किसी तरह यात्रियों को बाहर निकाला। इस हादसे में 13 लोगों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए। कई यात्रियों के सिर, हाथ, पैर और कंधे में गंभीर चोटें आईं और करीब 100 लोगों की हड्डियां टूट गईं।

रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी पुलिस और दमकल

घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे आगरा जोन के ADG अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस की PRV टीमें 6, 9 और 13 मिनट में मौके पर पहुंच गई थीं। इसके बाद स्थानीय थाना पुलिस और दमकल की गाड़ियां भी पहुंचीं। बसों में फंसे लोगों को निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था। मथुरा समेत तीन जिलों से बचाव दल बुलाए गए और करीब पांच घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला।

पांच घंटे बंद रहा यमुना एक्सप्रेसवे

हादसे के बाद आगरा से दिल्ली जाने वाली लेन को करीब पांच घंटे तक बंद करना पड़ा। यातायात पुलिस ने वाहनों को दूसरे मार्गों से डायवर्ट किया। सुबह 4:30 बजे से 8:30 बजे तक एक्सप्रेसवे पर जले और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने का काम चलता रहा। पुलिस ने बिखरे हुए यात्रियों के सामान को एक जगह सुरक्षित रखा।

कोहरे में रफ्तार बना काल

आंकड़े बताते हैं कि यमुना एक्सप्रेसवे पर कोहरे के दौरान हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2012 से 2023 के बीच केवल यमुना एक्सप्रेसवे पर ही घने कोहरे के कारण 338 सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें 75 लोगों की मौत और 665 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार है कि शून्य दृश्यता जैसी परिस्थितियों में सड़क पर आवागमन को अस्थायी रूप से रोका जाए। इसके बावजूद ऐसे हालात में ट्रैफिक बंद न किया जाना सवाल खड़े करता है।

सबक या फिर अगला हादसा

यह हादसा एक बार फिर बताता है कि कोहरे में तेज रफ्तार, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और इमरजेंसी इंतजामों की कमी किस तरह मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है। सवाल यही है कि क्या यह हादसा सिस्टम को जगाएगा या फिर अगली सुबह किसी और एक्सप्रेसवे पर ऐसा ही मातम दोहराया जाएगा?

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