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जीआई का बिगुल बजा, पुनः उत्तर प्रदेश नंबर वन, मथुरा जरी पोशाक और मेरठ बिगुल को मिला GI टैग

GI Tag : भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी मथुरा जरी पोशाक और स्वाधीनता क्रांति के केंद्र मेरठ के बिगुल को जी आई टैग की जानकारी मिलते ही सनातन से जुड़े पूरी दुनिया में फैले कृष्ण भक्त और सभी के मन में हर्ष उल्लास और श्रद्धा भाव से भर गया और वही मथुरा के सभी जरी पोशाक बनाने वाले शिल्पियों में उत्साह आ गया, जिसमें बहुत बड़ी तादाद में मुस्लिम शिल्पी शामिल हैं। जो कई पीढ़ियों से मथुरा में जरी पोशाक बना रहे हैं और इसमें हजारों महिला शिल्पियों का बड़ा योगदान है।

जी आई मैन ऑफ इंडिया के नाम से ख्यातिप्राप्त पद्मश्री सम्मानित डॉ रजनी कांत ने बताया कि मथुरा जरी पोशाक के लिए जिला प्रशासन और सिडबी में सहयोग प्रदान किया और स्थानीय महिलाओं की संस्था खजानी वेलफेयर सोसाइटी ने आवेदन किया था ।


वहीं दूसरी तरह क्रांति की धरती मेरठ से बिगुल संगीत वाद्य यंत्र के लिए नाबार्ड उत्तर प्रदेश और जिला प्रशासन के योगदान से मेरठ वाद्य यंत्र निर्माता विक्रेता व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन ने आवेदन किया था, मेरठ अपने संगीत वाद्य यंत्र निर्माता के रूप में पूरी दुनिया में जाना जाता है और आज भी बड़ी संख्या में यहां से बिगुल, ट्रांपिट, ड्रम सहित 10 अलग अलग तरह के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स यह बनते हैं और बैंड बाजा बारात की शोभा बढ़ाते हैं।


मेरठ के बिगुल का 1857 गदर में भी बड़ा योगदान रहा है। आज भी स्कूलों से ले कर सभी सेना, पुलिस, में भी नियमित रूप से बिगुल बजा कर ही शुरुआत होती है । इन दोनों क्राफ्ट को डॉ रजनी कांत के अगुआई में पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई के उपरांत इन दोनों क्राफ्ट को भारत की बौद्धिक संपदा में शामिल करते हुए जी आई पंजीकरण प्रदान किया गया।

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