UP News : कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व उपाध्यक्ष और विवादों में घिरे कथित पत्रकार विपिन गुप्ता को पुलिस ने मंगलवार दोपहर उसके घर के पास से गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर संस्था सच का आईना के महामंत्री शैलेंद्र कुमार को बंधक बनाकर मारपीट की और रंगदारी की मांग की.
मामला क्या है?
हंसपुरम आवास विकास निवासी शैलेंद्र कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वर्ष 2014 में वह सच का आईना संस्था के महामंत्री थे. संस्था का काम पीड़ितों की मदद कर उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचाना था. उन्होंने 20 अप्रैल 2015 को साकेतनगर में हो रहे अवैध निर्माण और किशोरी वाटिका गेस्ट हाउस के संचालन की शिकायत नगर आयुक्त समेत कई अधिकारियों से की थी.
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शिकायत के कुछ दिनों बाद, 12 मई 2015 की सुबह करीब 10:30 बजे कथित पत्रकार विपिन गुप्ता ने इंटरव्यू के बहाने उन्हें साकेतनगर स्थित कार्यालय बुलाया. आरोप है कि वहां मौजूद 4–5 लोगों ने शैलेंद्र की पिटाई कर दी. इस दौरान अखिलेश दुबे ने उनके मुंह में रिवॉल्वर ठूंसते हुए धमकाया और कहा कि शिकायतों की वजह से 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. जान बचानी है तो 20 लाख रुपये देने होंगे. शैलेंद्र किसी तरह माफी मांगकर बच निकले, लेकिन बाद में भी उनसे पैसों की मांग होती रही. शैलेंद्र की तहरीर पर विपिन गुप्ता, अखिलेश दुबे समेत सात लोगों के खिलाफ जबरन वसूली, रंगदारी, धमकी, मारपीट, बलवा और डकैती की धाराओं में केस दर्ज किया गया था.
पहले भी रहा है विवादों में
विपिन गुप्ता का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है. पहली बार 2011 में पुलिस ऑफिस के पास शार्प शूटर शानू ओलंगा की हत्या के लाइव फोटो छापकर चर्चा में आया. फिर 2013 में कानपुर प्रेस क्लब का चुनाव हारने के बावजूद पुलिस दबाव में उपाध्यक्ष बनाए गए. उसके बाद एक युवती की शिकायत पर महीनों तक जेल में रहे. ईगल नामक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर पत्रकारों व अफसरों पर आपत्तिजनक संदेश वायरल किए. ब्रह्मास्त्र ग्रुप के जरिए पत्रकारों, नेताओं और उद्यमियों की बदनामी कर रंगदारी वसूली गई.
पुलिस जांच और खुलासे
लखनऊ क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि विपिन गुप्ता फर्जी आईडी से सिम कार्ड लेता और कानपुर सेंट्रल स्टेशन के फ्री वाई-फाई से संदेश वायरल करता था. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि यह सब अखिलेश दुबे के इशारे पर होता था. दुबे के दबदबे के चलते कई मामले दबा दिए गए थे. विपिन गुप्ता के खिलाफ अधिवक्ताओं और पत्रकारों की शिकायतों पर विभिन्न थानों में कई बार एफआईआर दर्ज हो चुकी है. जांच में यह भी साबित हुआ कि ब्रह्मास्त्र व्हाट्सएप ग्रुप का असली संचालक वही था,जहां से आपत्तिजनक संदेश फैलाए जाते थे.

