UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद की पुलिस अधीक्षक (SP) आरती सिंह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें अदालत में तब तक बैठाए रखा, जब तक कि गिरफ्तार वकील को रिहा नहीं किया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने वाले पक्षकार को धमकाया गया और उनके वकील को हिरासत में ले लिया गया।
न्यायधीश का फैसला
मंगलवार को जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए SP को कोर्ट में ही हिरासत में लेने का आदेश दिया। बाद में राज्य के महाधिवक्ता ने थोड़ी मोहलत मांगी, जिस पर अदालत ने बुधवार दोपहर तक का समय देते हुए SP सिंह और उनकी पूरी टीम को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
अवैध रूप से हिरासत मे रखा
यह मामला फर्रुखाबाद निवासी प्रीति यादव की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है। प्रीति ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर की रात थाना प्रभारी और CO सहित कई पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे और दो परिजनों को अवैध रूप से एक हफ्ते तक हिरासत में रखा। इस दौरान उनसे जबरन लिखवाया गया कि वे पुलिस के खिलाफ शिकायत नहीं करेंगी और यह भी कि उन्होंने कोई याचिका दाखिल नहीं की है।
जब पुलिस ने यह बयान कोर्ट में पेश किया, तो न्यायालय ने इसे बेहद गंभीर माना और 14 अक्टूबर को अफसरों के हलफनामे के साथ प्रीति यादव को भी बुलाया। मंगलवार को प्रीति ने कोर्ट में पेश होकर स्पष्ट किया कि उन्होंने ही याचिका दायर की थी और पुलिस ने उनके पति को पकड़कर उन पर दबाव बनाया था कि वह केस वापस ले लें।
न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप
अदालत ने SP आरती सिंह की कार्यशैली को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने वाला बताया। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने बुधवार दोपहर 12 बजे सुनवाई का समय मांगा ताकि SP हलफनामा दाखिल कर सकें। इससे पहले, हाईकोर्ट ने 2021 में भी एक मामले में तत्कालीन DGP मुकुल गोयल को प्रयागराज में रोक दिया था, जब पुलिस ने आदेशों का पालन नहीं किया था।
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गैरकानूनी रूप से गिरफ्तारी
वहीं, फर्रुखाबाद के अधिवक्ता अवधेश मिश्र के घर पर पुलिस द्वारा तोड़फोड़ और उन्हें गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार करने का मामला भी सामने आया। अदालत को बताया गया कि यह कार्रवाई SP के निर्देश पर हुई थी। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और तुरंत एसपी सिंह को तलब कर फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि पुलिस का यह रवैया न्याय की प्रक्रिया पर सीधा प्रहार है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

