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यूपी सरकार ने लगाया जाति-आधारित रैलियों पर बैन, FIR में भी नहीं लिखी जाएगी जाति

UP News : उत्तर प्रदेश में जातीय भेदभाव को खत्म करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर जाति का उल्लेख करने और जाति-आधारित रैलियों के आयोजन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है। साथ ही FIR और गिरफ्तारी मेमो जैसे पुलिस दस्तावेजों में भी अब आरोपी या गवाह की जाति का जिक्र नहीं किया जाएगा।

कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रमुखों, जिलाधिकारियों और एसएसपी/एसपी को निर्देश भेजे हैं। इन आदेशों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश का असर

पिछले वर्ष अप्रैल में दर्ज एक केस में FIR में आरोपियों की जाति लिखे जाने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पुलिस रिकॉर्ड में जाति का उल्लेख गैर-कानूनी है। अदालत ने कहा था कि आधुनिक दौर में पहचान के कई तकनीकी साधन मौजूद हैं, ऐसे में जाति बताना समाज को बांटने वाला कदम है।

क्या होगा बदलाव

  • थानों में नोटिस बोर्ड, साइनबोर्ड और वाहनों पर लिखे जातीय संकेतक और नारे हटाए जाएंगे।
  • इंटरनेट मीडिया पर जाति-आधारित पोस्ट या कंटेंट साझा करना प्रतिबंधित होगा।
  • राजनीतिक दल या संगठन अब जाति के नाम पर रैली या सभा नहीं कर पाएंगे।
  • FIR और पुलिस रिपोर्ट में आरोपी की पहचान माता-पिता के नाम से होगी।
  • हालांकि, एससी/एसटी एक्ट जैसे विशेष मामलों में जाति का उल्लेख यथावत रहेगा।

राजनीतिक समीकरण पर असर

राज्य में पंचायत चुनाव की तैयारियों और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतियों के बीच आए इस फैसले से राजनीतिक दलों की जातीय राजनीति पर सीधा असर पड़ सकता है। खासकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी, जो लंबे समय से पिछड़े और दलित वर्ग को साधने की कोशिश करती रही हैं, उन्हें अब अपनी रणनीति बदलनी होगी।

अदालत के सुझाव

हाईकोर्ट ने अपने 28 पन्नों के आदेश में यह भी कहा कि पुलिस फार्मो में केवल पिता या पति का नाम नहीं, बल्कि मां का नाम भी शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की आसान व्यवस्था बनाई जाए ताकि लोग जातिवादी सामग्री की सूचना तुरंत दे सकें। अदालत ने साफ किया कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प में जाति का उन्मूलन अहम लक्ष्य होना चाहिए।

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इस ऐतिहासिक आदेश से उत्तर प्रदेश (UP News) की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

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