Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ा कानूनी झटका लगा है। यौन शोषण से जुड़े गंभीर आरोपों पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने सुनवाई के बाद जारी किया है।
पॉक्सो कोर्ट का सख्त आदेश
ADJ पॉक्सो एक्ट कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिवत जांच की जाए। अदालत के निर्देश के बाद अब झूंसी थाना पुलिस दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर विवेचना शुरू करेगी। माना जा रहा है कि इस आदेश से शंकराचार्य की कानूनी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
धारा 173(4) के तहत दाखिल हुई थी याचिका
यह मामला तब सामने आया जब शाकुंभरी पीठाधीश्वर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट से जुड़े आशुतोष ब्रह्मचारी ने 28 जनवरी को अदालत में धारा 173(4) के तहत अर्जी दाखिल की। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण किया जाता रहा है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में एक सीडी सौंपने का भी दावा किया, जिसमें कथित सबूत होने की बात कही गई।
नाबालिगों के बयान बने अहम आधार
मामले में 13 फरवरी को आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए। कोर्ट ने पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट को भी संज्ञान में लिया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब जारी कर दिया गया है।
आदेश के बाद क्या बोले आशुतोष ब्रह्मचारी
कोर्ट के फैसले के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिला है। उन्होंने घोषणा की कि वह प्रयागराज से विद्या मठ वाराणसी तक पैदल “सनातन यात्रा” निकालेंगे और आम लोगों के सामने सच्चाई रखेंगे। उनका आरोप है कि विद्या मठ में ही नाबालिग बच्चों के साथ शोषण की घटनाएं हुई थीं। यह मामला अब जांच के अहम दौर में प्रवेश कर चुका है और आने वाले दिनों में पुलिस कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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