होम = State = उत्तर प्रदेश = Kanwar Yatra 2025 : सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी, यूपी सरकार के QR कोड सिस्टम पर नहीं लगेगा ब्रेक

Kanwar Yatra 2025 : सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी, यूपी सरकार के QR कोड सिस्टम पर नहीं लगेगा ब्रेक

Kanwar Yatra QR code case : कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) को लेकर चल रहे QR कोड विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh government) के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने यात्रा मार्ग पर दुकानों और ढाबों में QR कोड लगाने के सरकारी आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं को कोई राहत देने से इंकार कर दिया और स्पष्ट रूप से कहा कि सभी होटल और ढाबा मालिकों को वैधानिक नियमों के अनुसार अपने लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना आवश्यक है।

क्या बोली सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उन्हें बताया गया है कि आज कांवड़ यात्रा का अंतिम दिन है और निकट भविष्य में इसके समाप्त होने की संभावना है। इसी संदर्भ में कोर्ट ने केवल यह निर्देश दिया है कि सभी संबंधित व्यापारी वैधानिक आवश्यकताओं के मुताबिक अपने दस्तावेजों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस समय अन्य विवादित मुद्दों पर विचार नहीं कर रही है।

डिजिटल कोड को स्कैन करने की अपील की

सावन मास में लाखों शिव भक्तों द्वारा की जाने वाली पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने यात्रा मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों, ढाबों और दुकानों को QR कोड लगाने का निर्देश दिया था। इन डिजिटल कोड को स्कैन करने से दुकान मालिकों के नाम, धर्म और अन्य व्यक्तिगत जानकारी का पता चलता था। राज्य सरकार की ओर से इस कदम के पीछे तर्क दिया गया था कि यह खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और तीर्थयात्रियों को दुकानों की स्वच्छता एवं गुणवत्ता के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है।

‘व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं’

इस विवादित आदेश के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद झा, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता आकार पटेल, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और एनजीओ ‘एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह था कि QR कोड लगाने का सरकारी आदेश न केवल संविधान द्वारा प्रदत्त निजता के मौलिक अधिकार का प्रत्यक्ष उल्लंघन है, बल्कि यह धार्मिक आधार पर भेदभाव और सामुदायिक विभाजन को भी प्रोत्साहित कर सकता है।

ये भी पढें : UP News : उत्तर प्रदेश में बड़ा आतंकी प्लान नाकाम, लोन वुल्फ अटैक की साजिश को पुलिस ने किया बेनकाब

उनका कहना था कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 2024 के महत्वपूर्ण आदेश की भी अवमानना है, जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया था कि दुकानदारों को अपनी व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

बंगाल