Ram lala Surya Tilak: रामनगरी अयोध्या आज एक अद्भुत और अलौकिक दृश्य की साक्षी बनने जा रही है। रामनवमी के पावन अवसर पर दोपहर ठीक 12 बजे ऐसा क्षण आएगा, जब विज्ञान और आस्था का संगम दिखेगा सूर्य की किरणें सीधे रामलला के ललाट पर तिलक करेंगी। यह दिव्य दृश्य करीब 4 मिनट तक रहेगा, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उत्सुक हैं।
विज्ञान और आस्था का संगम
रामलला का ‘सूर्य तिलक’ किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन इसके पीछे अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक काम कर रही है। खास ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम के जरिए सूर्य की किरणों को दर्पण और लेंस के माध्यम से इस तरह निर्देशित किया गया है कि वे ठीक दोपहर 12 बजे रामलला के मस्तक पर पड़ें। इस पूरी तकनीक को विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने तैयार किया है, जिसमें सूर्य की गति और कोण का बारीकी से अध्ययन किया गया। खास बात यह है कि आने वाले वर्षों में भी बिना बदलाव के यह प्रक्रिया ऐसे ही काम करती रहेगी।
जन्मोत्सव की भव्य तैयारियां
रामलला के जन्मोत्सव को भव्य बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
भगवान को पीतांबर (पीले वस्त्र) पहनाए जाएंगे
गर्भगृह में जन्म के समय 14 विशेष पुजारी मौजूद रहेंगे
सुबह 9 बजे दूध, दही, घी, शहद, नारियल जल और चंदन से अभिषेक होगा
जन्म के बाद रामलला को सोने-चांदी की कढ़ाई वाले वस्त्र और आभूषण पहनाए जाएंगे
मुकुट में जड़े हीरे, स्वर्ण आभूषण और हाथों में धनुष-बाण इस दिव्यता को और बढ़ाएंगे।
56 भोग से होगा स्वागत
जन्म के बाद रामलला को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। इसमें खीर, हलवा, पंचामृत, खुरचन पेड़ा और विभिन्न प्रकार की पंजीरी शामिल हैं। करीब 10 क्विंटल प्रसाद तैयार किया गया है, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
अभेद सुरक्षा व्यवस्था
इस बार अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था भी हाईटेक है।
पहली बार AI तकनीक और 1000+ CCTV कैमरों से निगरानी
ड्रोन से सर्विलांस
सरयू घाटों पर SDRF और NDRF की तैनाती
सादी वर्दी में पुलिसकर्मी भीड़ में मुस्तैद
भारी वाहनों को शहर से दूर डायवर्ट किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।
हर पल होगा लाइव
इस ऐतिहासिक क्षण का सीधा प्रसारण टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा। मंदिर परिसर में भी कई LED स्क्रीन लगाई गई हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस दिव्य दृश्य का दर्शन कर सकें।
दर्शन का समय और खास व्यवस्था
रामनवमी पर श्रद्धालु सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक दर्शन कर सकेंगे। आरती पास धारकों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। हालांकि सूर्य तिलक के समय से आधे घंटे पहले और बाद तक वीआईपी एंट्री बंद रहेगी।
क्यों है यह क्षण इतना खास?
यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और विज्ञान का अद्भुत मेल है। जब सूर्य की किरणें 75 मिमी के गोलाकार रूप में रामलला के मस्तक को स्पर्श करेंगी, तो वह दृश्य इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। आज अयोध्या में सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि एक ऐसा दिव्य अनुभव हो रहा है, जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
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