Shahjahanpur Juta Maar Holi: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि इतिहास और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यहां दशकों से निभाई जा रही अनोखी ‘जूता-मार होली’ हर साल देशभर का ध्यान खींचती है। इस परंपरा में बड़े और छोटे ‘लाट साहब’ के जुलूस निकलते हैं, जहां अंग्रेजी हुकूमत के प्रतीक के तौर पर एक व्यक्ति को भैंसा-गाड़ी पर बैठाकर जूते और झाड़ू से प्रतीकात्मक रूप से पीटा जाता है। माना जाता है कि यह परंपरा औपनिवेशिक दौर के आक्रोश और प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है।
92 धार्मिक स्थलों पर तिरपाल
होली से करीब आठ दिन पहले ही प्रशासन व्यापक तैयारियों में जुट जाता है। जुलूस मार्ग पर पड़ने वाली 92 मस्जिदों और मजारों को तिरपाल से ढक दिया गया है, ताकि रंग-गुलाल से किसी तरह का विवाद न हो और आपसी सौहार्द बना रहे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
ड्रोन और बॉडी कैमरे
इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। जुलूस की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही है, वहीं पुलिसकर्मी बॉडी कैमरे लगाकर साथ चलेंगे ताकि हर गतिविधि रिकॉर्ड रहे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी जुलूस के साथ रहेंगी।
98 स्थानों पर बैरिकेडिंग
नगर आयुक्त विपिन मिश्रा के अनुसार, बड़े लाट साहब के जुलूस मार्ग में आने वाली 72 और छोटे लाट साहब के रूट की 20 धार्मिक जगहों को तिरपाल से ढका गया है। कुल 98 स्थानों पर बैरिकेडिंग की जा रही है, ताकि रंग इन स्थलों तक न पहुंचे और शांति बनी रहे।
संवेदनशील इलाके
पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने बताया कि जिले में परंपरागत रूप से 18 जुलूस निकलते हैं। कोतवाली, सदर बाजार और रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र को विशेष रूप से संवेदनशील मानते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। शांति समितियों के साथ लगातार बैठकें कर आपसी सहमति से व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
परंपरा भी, भाईचारा भी
प्रशासन का साफ संदेश है परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द साथ-साथ चलेंगे। इसी संतुलन के साथ सुरक्षा इंतजाम, तकनीकी निगरानी और सामुदायिक समन्वय पर जोर दिया जा रहा है, ताकि शाहजहांपुर की यह अनोखी होली शांति, उत्साह और आपसी सम्मान के साथ संपन्न हो सके।

