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यूपी में शहरों के नाम बदलने को लेकर सियासत तेज, शाहजहांपुर, गाजीपुर और अलीगढ़ की नई पहचान पर उठी मांग

Uttar Pradesh : उत्तर प्रदेश में जिलों, शहरों और मोहल्लों के नाम बदलने को लेकर सियासत लगातार गर्माई हुई है। शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने के बाद अब कई अन्य जिलों और शहरों के नाम बदलने की मांग जोर पकड़ रही है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने तीन दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शाहजहांपुर का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि शाहजहांपुर नाम गुलामी के दौर का प्रतीक है और इसे बदलना आवश्यक है।

महर्षि दुर्वासा के नाम पर करने की मांग की

गाजीपुर के लिए भी नाम बदलने की मांग उठी है। बलिया की बीजेपी विधायक केतकी सिंह ने कहा कि गाजीपुर का नाम महर्षि गौतम के नाम पर रखा जाना चाहिए। उन्होंने इसके साथ ही आजमगढ़ का नाम महर्षि दुर्वासा के नाम पर करने की मांग भी की।अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ किए जाने की मांग कई सालों से उठ रही है। साल 2021 में अलीगढ़ के सांसद और विधायकों ने इसके लिए प्रस्ताव पास किया था। अब यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फिर से भेजा गया है। इसी तरह सुल्तानपुर का नाम कुशभवनपुर करने की मांग भी लंबे समय से उठ रही है।

इन शहरों के नाम बदले गए

राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने विदेशी आक्रांताओं के नाम वाली सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और भवनों के नाम बदलने की आवश्यकता जताई। यूपी में पहले से कई नाम बदले जा चुके हैं। फैजाबाद का नाम अयोध्या और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया गया। मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन किया गया। गोरखपुर में कई वार्डों के नाम भी बदले गए हैं। 2022 में मुंडेरा बाजार का नाम चौरी चौरा और देवरिया के तेलिया अफगान का नाम तेलिया शुक्ल कर दिया गया था। इसी साल गोरखपुर में मियां बाजार, मुफ्तीपुर, अलीनगर, तुर्कमानपुर और इस्माइलपुर जैसे मुस्लिम नाम वाले वार्डों के नाम बदले गए।

सनातन संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास

संस्कृति और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने फिरोजाबाद का नाम चंद्रनगर करने का प्रस्ताव सीएम को भेजा। उन्होंने कहा कि यह विकास के साथ-साथ सनातन संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास है। वहीं, सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि बीजेपी के पास नाम बदलने के अलावा कोई काम नहीं है और सरकार को इसके लिए आयोग बनाना चाहिए। इस विवाद ने दिखा दिया है कि यूपी में नाम बदलने का मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।

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