Noida Engineer Yuvraj Mehta: ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में आखिरकार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने जांच में भूमिका सामने आने के बाद यह कदम उठाया, लेकिन इस गिरफ्तारी के बावजूद प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल और भी गहरे हो गए हैं।
युवराज की मौत के चार दिन बाद भी उसकी कार पानी से बाहर नहीं निकाली जा सकी है, जो रेस्क्यू सिस्टम की गंभीर नाकामी को उजागर करता है। हादसा रात करीब 11:45 बजे हुआ था, जब युवराज की कार एक गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह करीब दो घंटे तक कार में फंसा रहा और मदद के लिए आवाज़ लगाता रहा, लेकिन समय पर कोई गोताखोर नहीं उतारा गया।
सूचना मिलने के बाद 12:06 बजे फायर ब्रिगेड को कॉल की गई और 12:25 बजे दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन जरूरी संसाधनों के अभाव में रेस्क्यू आगे नहीं बढ़ सका। एसडीआरएफ की टीम तड़के करीब चार बजे पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक स्थानीय युवक ने रस्सी बांधकर बचाव की कोशिश की, लेकिन युवराज को नहीं बचाया जा सका।
इस पूरे घटनाक्रम ने नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाली डीएम मेधा रूपम का चार दिन तक मौके पर न पहुंचना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। गिरफ्तारी से कार्रवाई शुरू जरूर हुई है, लेकिन युवराज की मौत ने सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया है।

