Hathras minor outrage case: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। यहां सिकंदरा राउ पुलिस थाना क्षेत्र के एक गांव में दो नाबालिग लड़कों ने कथित रूप से एक नौ वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार किया। यह मामला बेहद संवेदनशील है क्योंकि सभी शामिल बच्चे ही नाबालिग हैं।
शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे यह वारदात हुई। पीड़िता, जो चौथी कक्षा में पढ़ती है, अपने गांव के नजदीक जंगल में चारा (घास-फूस) इकट्ठा करने गई थी। तभी उसी गांव के दो लड़के उसके पास आए। उन्होंने उसे बेर खाने का लालच देकर गेहूं के खेत में ले गए। आरोपियों की उम्र करीब 10 वर्ष और 12 वर्ष बताई जा रही है।
खेत में पहुंचते ही आरोप है कि 10 साल के लड़के ने बच्ची को पकड़ लिया, जबकि 12 साल के लड़के ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता घर लौटने के बाद रोते हुए अपनी मां को सारी घटना बताई। परिवार ने तुरंत सिकंदरा राउ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस कार्रवाई
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच शुरू की। दोनों आरोपियों को शनिवार देर रात हिरासत में लिया गया। उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें हाथरस के किशोर सुधार गृह (जुवेनाइल होम) में भेज दिया गया।मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 70(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़िता की मेडिकल जांच पूरी हो चुकी है, जिसके आधार पर आरोपों की पुष्टि की जा रही है। सर्कल ऑफिसर जेएन अस्थाना ने बताया कि सभी पक्ष नाबालिग होने के कारण जांच सतर्कता से की जा रही है। थाना प्रभारी ने भी पुष्टि की कि आरोपियों को सुधार गृह में रखा गया है।
एक ही गांव के रहने वाले हैं आरोपी
यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि आरोपी और पीड़िता एक ही गांव के रहने वाले हैं। छोटी उम्र में ऐसी हरकतें बच्चों के मानसिक विकास, शिक्षा और समाज में फैल रही जागरूकता की कमी को दर्शाती हैं। पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त प्रावधान हैं, लेकिन जब अपराधी खुद बच्चे हों तो मामला जटिल हो जाता है। ऐसे मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट लागू होता है, जो सुधार पर जोर देता है।
परिवार और स्थानीय लोग इस घटना से सदमे में हैं। बच्ची की मां ने बताया कि उनकी बेटी अब डरी हुई है और सामान्य जीवन जीने में असमर्थ महसूस कर रही है। समाजसेवी और अधिकार कार्यकर्ता इस मामले में बच्चों की सुरक्षा, लैंगिक शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान की मांग कर रहे हैं।

