होम = Cover Story Big = बीएसपी के खिलाफ साजिश कर रहे विरोधी…यूपी में अकेले लड़ेंगे चुनाव, मायावती ने किया बड़ा ऐलान

बीएसपी के खिलाफ साजिश कर रहे विरोधी…यूपी में अकेले लड़ेंगे चुनाव, मायावती ने किया बड़ा ऐलान

Mayawati BSP announcement: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में पार्टी किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी और आगामी चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। उनके इस बयान को राज्य की राजनीति में अहम संकेत माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि बीएसपी विपक्षी दलों के साथ हाथ मिला सकती है।

गठबंधन की अटकलों पर विराम

हाल के महीनों में कई राजनीतिक चर्चाओं में बीएसपी के संभावित गठबंधन को लेकर सवाल उठ रहे थे। हालांकि मायावती ने साफ कहा कि पार्टी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि बीएसपी का गठन सामाजिक न्याय और बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हुआ था और इसी सिद्धांत पर आगे भी काम किया जाएगा। बसपा प्रमुख ने कहा कि गठबंधन की राजनीति अक्सर पार्टी के मूल एजेंडे को कमजोर कर देती है, इसलिए संगठन ने अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है।

संगठन को मजबूत करने पर जोर

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए सबसे जरूरी है कि कार्यकर्ता मतदाताओं तक सीधे पहुंच बनाएं और पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुंचाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि बीएसपी को केवल चुनावी दल नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन के रूप में काम करना चाहिए। इसके लिए युवाओं, महिलाओं और दलित-पिछड़े वर्गों को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अन्य दलों पर भी निशाना

अपने बयान में मायावती ने सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों पर परोक्ष हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक पार्टियां चुनाव के समय ही गरीब और वंचित वर्ग की बात करती हैं, जबकि बीएसपी लगातार उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दे आम जनता को प्रभावित कर रहे हैं और इन विषयों को लेकर पार्टी चुनावी अभियान चलाएगी।

यूपी की राजनीति पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएसपी का अकेले चुनाव लड़ना राज्य की चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है। उत्तर प्रदेश में बहुकोणीय मुकाबला होने पर वोटों का बंटवारा बढ़ेगा, जिसका असर प्रमुख दलों की रणनीति पर भी पड़ेगा।
बीएसपी का पारंपरिक वोट बैंक दलित और कुछ पिछड़े वर्गों में मजबूत माना जाता है। ऐसे में पार्टी का स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरना कई सीटों पर परिणामों को अप्रत्याशित बना सकता है।

कार्यकर्ताओं को संदेश

मायावती ने पार्टी नेताओं और समर्थकों से अनुशासन बनाए रखने और आपसी मतभेदों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार चयन में सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक सक्रियता को प्राथमिकता दी जाएगी।
उनका कहना था कि यदि कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करें तो पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

आगे की रणनीति

बीएसपी जल्द ही प्रदेशभर में बैठकों और जनसभाओं की शुरुआत करेगी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जमीनी स्तर पर मजबूत तैयारी और स्पष्ट संदेश के साथ चुनाव में उतरकर संगठन अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर सकता है। मायावती के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में बीएसपी अपनी स्वतंत्र राह अपनाते हुए सीधे मुकाबले की रणनीति पर आगे बढ़ेगी।

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