होम = News Big = जब ‘प्रह्लाद’ बना युवक और लपटों ने नहीं किया नुकसान, मथुरा से हैरान कर देने वाला VIDEO

जब ‘प्रह्लाद’ बना युवक और लपटों ने नहीं किया नुकसान, मथुरा से हैरान कर देने वाला VIDEO

UP News: उत्तर प्रदेश के मथुरा से एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने लोगों को चौंका भी दिया और आस्था की शक्ति पर सोचने को मजबूर भी कर दिया। होलिका दहन की धधकती आग के बीच एक युवक निडर होकर उतर गया। वीडियो में वह लपटों के बीच से गुजरता दिखाई देता है और कुछ ही पलों में सुरक्षित बाहर आ जाता है। पहली नजर में यह किसी फिल्मी दृश्य जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे गहरी धार्मिक परंपरा जुड़ी है।

फालेन गांव की सदियों पुरानी परंपरा

यह अनोखी रस्म मथुरा के फालेन गांव में निभाई जाती है। यहां हर साल एक श्रद्धालु ‘प्रह्लाद’ की भूमिका निभाते हुए होलिका दहन की अग्नि से होकर गुजरता है। इस वर्ष यह परंपरा संजू पांडा नामक युवक ने निभाई। उन्होंने बताया कि यह कोई साहसिक स्टंट नहीं, बल्कि सवा महीने की कठोर साधना का परिणाम होता है।

सवा महीने का कठिन व्रत

संजू पांडा के अनुसार, इस परंपरा की तैयारी बसंत पंचमी से शुरू हो जाती है और होलिका दहन तक चलती है। इस अवधि में व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। वह घर-परिवार से दूरी बनाता है, गांव की सीमाओं से बाहर नहीं जाता और अन्न का त्याग करता है। उनका कहना है कि इस साधना के दौरान सांसारिक मोह समाप्त कर केवल भक्ति और संयम पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

आस्था और साहस का संगम

होलिका दहन की रात गांव में हजारों लोग इस परंपरा के साक्षी बनते हैं। जब अग्नि प्रज्वलित होती है, तब ‘प्रह्लाद’ बने श्रद्धालु मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण के बीच आग में प्रवेश करता है। कुछ ही क्षणों बाद वह सुरक्षित बाहर निकल आता है। ग्रामीणों का मानना है कि यह आस्था, संयम और ईश्वर पर अटूट विश्वास का प्रतीक है।

मथुरा-वृंदावन की होली का अनोखा रंग

मथुरा और वृंदावन की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां रंगों की होली, फूलों की होली और लठमार होली जैसे आयोजन कई दिनों तक चलते हैं। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस अद्भुत उत्सव का हिस्सा बनने पहुंचते हैं। कृष्ण-राधा की भक्ति में डूबा यह क्षेत्र होली के दौरान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर उठता है।

इस बार बदली तारीखों की चर्चा

इस वर्ष होली 4 मार्च को मनाई जा रही है, जबकि होलिका दहन 2 मार्च को संपन्न हुआ। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने के कारण तिथियों में यह बदलाव किया गया। अब रंगों वाली होली को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। फालेन गांव की यह परंपरा हर साल लोगों को हैरान करती है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था की जीवंत मिसाल है।

ये भी पढ़ें: डूरंड लाइन पर बारूद की लकीर! तालिबान का बड़ा धावा, पाकिस्तान के अहम ठिकाने निशाने पर

Tags : up news

बंगाल