क्या आप सोच सकते हैं कि एक छोटा सा स्लोगन , आई लव मोहम्मद , कैसे यूपी (UP) की राजनीति में भूचाल ला सकता है ? अभी नवरात का मौसम है लेकिन सियासत की गर्मी ने सर्दियों तक को मात दे दी है | उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों बिलकुल अलग रंग में दिख रही है। “आई लव मोहम्मद” कैंपेन की शुरुआत एक छोटे से मुद्दे की तरह हुई थी, लेकिन अब यह विवाद बड़ा सियासी ट्रेंड बन गया है। इस कैंपेन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ऐसा मुद्दा थमा दिया है, जिससे उनकी छवि और मजबूत हो गई है।
सरकार और विपक्ष दोनों इस कैंपेन को लेकर खूब चर्चा में हैं।बरेली में हुए “आई लव मोहम्मद”( i love muhammad) प्रदर्शन के बाद समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता सुमैया राणा ने बयान दिया कि अब लखनऊ में भी इसी तरह का प्रदर्शन होगा। इसके बाद सरकार और पुलिस ने अभियान चलाने वालों के खिलाफ कड़ी एक्शन शुरू कर दी। मुख्यमंत्री योगी ने खुलकर विरोध जताते हुए आरोपियों को सबक सिखाने की बात कही और मुस्लिम कट्टरपंथ के खिलाफ सख्त कदम उठाने के संकेत दिए।
नवरात्र के समय हुए इस विवाद का माहौल और भी गर्म है, क्योंकि एक ओर हिंदू पर्व चल रहा है और दूसरी ओर मुस्लिम इलाकों में प्रदर्शन हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी ने साफ कर दिया है कि हिंदुओं के पवित्र दिनों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा। उनकी बातों ने विपक्ष और मुस्लिम नेताओं को भी सख्त संदेश दे दिया है।इसके लेकर समाजवादी पार्टी के लिए दुविधा की स्थिति बन गई है। वह इस मुद्दे पर खुलकर बोल रही है, लेकिन डर है कि कहीं यह हिंदू बनाम मुस्लिम में न बदल जाए।
सियासी जानकार मानते हैं कि अगर यह मामला ज्यादा बड़ा हो गया, तो सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री योगी के तेवर दिखा रहे हैं कि वह इस विवाद को कम होने नहीं देंगे। वे चाहते हैं कि यह मुद्दा पूरी तरह सियासी बहस का केंद्र बना रहे, ताकि विपक्ष दबाव में रहे।फिलहाल “आई लव मोहम्मद”(i love muhammad) कैंपेन ने यूपी चुनावी राजनीति में पूरी तरह से हलचल मचा दी है। देखना होगा, ये विवाद किस दिशा में जाता है और कौन सी पार्टी इसका फायदा या नुकसान होता है ?
ये भी पढ़े : होटल से सीधे गिरफ्तारी : आगरा में पकड़ा गया चैतन्यानंद, फर्जी विजिटिंग कार्डों का रहस्य उजागर

