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Ghaziabad News: डासना में किसानों की ट्यूबवेल पर जीडीए की कार्रवाई, सनसिटी पर कब्जे की साजिश का आरोप

Ghaziabad News: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की कार्रवाई को लेकर डासना इलाके में बवाल मचा हुआ है। किसानों का आरोप है कि कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के बावजूद जीडीए ने उनके खेतों में बने ट्यूबवेल और सिंचाई प्रणाली को ध्वस्त कर दिया। किसानों का कहना है कि इस कार्रवाई के पीछे सन सिटी बिल्डर का दबाव है, ताकि किसानों को प्रताड़ित किया जा सके और उनकी जमीन खरीदी जा सके।

नोटिस और कार्रवाई का विवरण

जीडीए ने 2 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा-27(1) के अंतर्गत ग्राम डासना के खसरा संख्या 3955 स्थित भूमि के संबंध में एक नोटिस जारी किया था। नोटिस (केस संख्या GDA/Z5/ANI/2025/0004231, प्रेषण संख्या GDA/DSP/0017212) में कहा गया था कि संबंधित भूमि पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण किया गया है। इसमें कथित अनाधिकृत निर्माण को 15 दिन के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए थे, अन्यथा जीडीए स्वयं इसे ध्वस्त कर देगा और व्यय राजस्व के रूप में वसूला जाएगा। आदेश पर सक्षम प्राधिकारी योगेश कुमार के हस्ताक्षर थे।

किसानों का आरोप – जवाब देने के बावजूद तोड़ा ढांचा

किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर नोटिस का जवाब दिया और जीडीए को स्पष्ट कर दिया कि जमीन पर कोई स्थायी निर्माण नहीं है। किसानों ने कहा, “हमारे खेतों में सिंचाई के लिए सिर्फ़ ट्यूबवेल, पंप सेट और अस्थायी ढांचे थे। न कोई कॉलोनी थी, न कोई पक्का घर। इसके बावजूद, जीडीए का बुलडोज़र आया और हमारी सिंचाई व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया।”

सनसिटी पर गंभीर आरोप

लोकमत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नज़र चौधरी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से सन सिटी बिल्डर के दबाव में की गई है। उन्होंने कहा, “सन सिटी हमारी पुश्तैनी जमीन जबरदस्ती खरीदना चाहती है। जब हमने ज़मीन बेचने से साफ़ इनकार कर दिया, तो जीडीए पर दबाव बनाकर बुलडोज़र चलवा दिया गया। यह हमें परेशान करने की साज़िश है ताकि हम ज़मीन बेचने पर मजबूर हो जाएं।” उन्होंने आगे कहा कि यह किसानों के अधिकारों का हनन है और वे इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे।

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गांव में रोष, आंदोलन की चेतावनी

घटना के बाद किसानों में रोष है। उनका कहना है कि यह सिर्फ़ एक खेत का मामला नहीं है, बल्कि यह किसानों की ज़मीन पर कब्जे की शुरुआत है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

-कपिल मेहरा